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एम्स में छह महीने बाद मिली थी तारीख, अब कैंसर मरीज को लौटा दिया वापस

Fri, 15 May 2020 10:25 PM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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एम्स
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दिल्ली एम्स में एक वर्ष तक उपचार कराने के बाद कैंसर मरीज को छह महीने बाद की तारीख मिली थी, लेकिन जब मरीज उस तय वक्त पर एम्स पहुंचा, तो गार्ड ने बाहर से ही उसे चलता कर दिया। अब कैंसर मरीज अपने घर पर बच्चों के साथ उपचार के लिए तड़प रहा है।
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दिल्ली निवासी मोहम्मद जहांगीर ने बताया कि वह एम्स में एक साल से उपचार करा रहे हैं। छह महीने पहले उन्हें 14 मई की ऑपरेशन के लिए तारीख मिली थी, लेकिन जब वे बीते बृहस्पतिवार एम्स पहुंचे तो वहां तैनात गार्ड ने उन्हें वापस भेज दिया। जहांगीर 10 दिन से खाना नहीं पा रहे हैं। उनके मुंह में कैंसर है। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि अब वे अपना उपचार कैसे और कहां कराएं। उधर एम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डीके शर्मा ने इस मामले को लेकर जवाब नहीं दिया।

दिल्ली में यह सिर्फ एक ही केस नहीं है। ईडब्ल्यूएस कमेटी के सदस्य एडवोकेट अशोक अग्रवाल बताते हैं कि हर दिन मरीजों को उपचार के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उनके पास हर दिन 10 से 15 मरीजों की शिकायतें आ रही हैं।
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अमर उजाला ने पिछले दो दिन में अलग-अलग अस्पतालों की पड़ताल में पाया कि कुछ मरीजों को कोरोना होने के बाद भी भर्ती नहीं किया जा रहा, तो कुछ को बिस्तर खाली न होने के कारण दूसरे अस्पतालों में रेफर कर दिया जा रहा है।

रेफरल सिस्टम की वजह से ही आरएमएल अस्पताल ने बताया था कि 11 मई तक उनके यहां कोविड से 63 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 16 मृत अवस्था में पहुंचे थे। अस्पताल के डॉक्टरों ने यहां तक स्वीकार किया कि समय रहते इन्हें उपचार मिलता, तो शायद कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं। दिल्ली पुलिस के जवान का केस भी ऐसा ही था।
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केस : 1, चाचा नेहरू अस्पताल

ठीक ऐसा ही एक और मामला पूर्वी दिल्ली के चाचा नेहरू अस्पताल में देखने को मिला। यहां मुरादाबाद निवासी जब्बार अपने छह दिन के नवजात शिशु को लेकर अस्पताल पहुंचे, तो आईसीयू में बिस्तर न होने की वजह से उन्हें भर्ती करने से इंकार कर दिया। जब्बार ने बताया कि वह मजदूरी करके अपने परिवार का पालन कर रहा है, लेकिन बड़ी मुश्किल से वह चाचा नेहरू अस्पताल तक पहुंचा। शिशु को पेट में दर्द के अलावा बुखार लगातार बना हुआ है। उन्होंने आपातकालीन वार्ड में मौजूद स्वास्थ्य कर्मचारियों से भी अपील की, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। हालांकि देर रात एडवोकेट अशोक अग्रवाल ने शीर्ष अधिकारियों से बातचीत के बाद बच्चे को भर्ती कराया।

केस : 2
लोकनायक अस्पताल
उपचार को लेकर मरीजों की हो रही दुर्दशा की एक और घटना लोकनायक अस्पताल में देखने को मिली। यहां मैक्स अस्पताल (पटपड़गंज) से मरीज अकबर अली को लाया गया था। हार्ट की परेशानी होने के अलावा कोविड पॉजिटिव होने के बाद भी घंटों तक अकबर अली अस्पताल के बाहर एंबुलेंस में रहे। परिजनों के अनुसार, आईसीयू में बेड न होने का हवाला देकर डॉक्टर भर्ती करने से इंकार कर रहे थे। कभी आरएमएल तो कभी सफदरजंग अस्पताल में ले जाने की सलाह दे रहे थे, लेकिन मरीज को भर्ती नहीं किया गया। आखिरकार दो दिन पहले अकबर अली ने कोविड संक्रमण के चलते दम तोड़ दिया।
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