ठीक ऐसा ही एक और मामला पूर्वी दिल्ली के चाचा नेहरू अस्पताल में देखने को मिला। यहां मुरादाबाद निवासी जब्बार अपने छह दिन के नवजात शिशु को लेकर अस्पताल पहुंचे, तो आईसीयू में बिस्तर न होने की वजह से उन्हें भर्ती करने से इंकार कर दिया। जब्बार ने बताया कि वह मजदूरी करके अपने परिवार का पालन कर रहा है, लेकिन बड़ी मुश्किल से वह चाचा नेहरू अस्पताल तक पहुंचा। शिशु को पेट में दर्द के अलावा बुखार लगातार बना हुआ है। उन्होंने आपातकालीन वार्ड में मौजूद स्वास्थ्य कर्मचारियों से भी अपील की, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। हालांकि देर रात एडवोकेट अशोक अग्रवाल ने शीर्ष अधिकारियों से बातचीत के बाद बच्चे को भर्ती कराया।
केस : 2
लोकनायक अस्पताल
उपचार को लेकर मरीजों की हो रही दुर्दशा की एक और घटना लोकनायक अस्पताल में देखने को मिली। यहां मैक्स अस्पताल (पटपड़गंज) से मरीज अकबर अली को लाया गया था। हार्ट की परेशानी होने के अलावा कोविड पॉजिटिव होने के बाद भी घंटों तक अकबर अली अस्पताल के बाहर एंबुलेंस में रहे। परिजनों के अनुसार, आईसीयू में बेड न होने का हवाला देकर डॉक्टर भर्ती करने से इंकार कर रहे थे। कभी आरएमएल तो कभी सफदरजंग अस्पताल में ले जाने की सलाह दे रहे थे, लेकिन मरीज को भर्ती नहीं किया गया। आखिरकार दो दिन पहले अकबर अली ने कोविड संक्रमण के चलते दम तोड़ दिया।