अंकल! हमारे मम्मी-पापा लॉकडाउन से पहले बिहार गए थे और वहीं फंस गए। हम यहां गौंछी में एक किराए के मकान में रहते हैं। घर में राशन खत्म हो गया है। जो थोड़े बहुत पैसे थे, वे भी खत्म हो गए हैं। घर में खाने को कुछ नहीं बचा है।
बच्चों की यह व्यथा सुनकर चाइल्ड हेल्पलाइन के कर्मी ने सारी जानकारी अधिकारियों को दी, जिस पर उन बच्चों तक राशन पहुंचाया गया। लॉकडाउन के दौरान हेल्पलाइन नंबर पर आई 220 कॉल में से 196 खाने के लिए थीं।
चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर की जिला संयोजक सुनीता देवी ने बताया कि ऐसा ही एक और मामला खेड़ीपुल थाना क्षेत्र से आया था। फोन 11 साल के बच्चे ने किया था। उसने बताया कि उनके पिता नहीं हैं और माता दिव्यांग हैं।
लॉकडाउन से पहले 15 वर्षीय बड़ा भाई थोड़ा बहुत जो कमा कर लाता था, उसी से उनका घर चलता था, मगर वह भी बंद हो गया है। घर में खाने को कुछ नहीं बचा। इस पर हेल्पलाइन टीम ने उनके परिवार को राशन मुहैया करवाया।