वैसुकलर सर्जन डॉक्टर मुकेश गोयल ने प्रेस वार्ता में बताया कि अभी तक इस तरह के मरीज सिर्फ उन्हें दो बार ही नजर आए हैं। ये दोनों ही मरीज उपचार से पहले दम तोड़ चुके थे।
लेकिन विनोद के मामले में ऐसा नहीं हुआ। जिस दिन मरीज को अस्पताल लाया गया था, तब वहां उनके परिवार ने बताया कि वह कुछ दिन से बुखार महसूस कर रहे थे, हालांकि मरीज की मेडिकल हिस्ट्री जांची गई तो पता चला कि वह वह न तो शराब पीने के आदी थे और न ही सिगरेट पीने के। ऐसे में हार्ट अटैक होने की वजह समझ नहीं आई।
निकल रहा था गाढ़ा पदार्थ
डॉ. गोयल के अनुसार, इको कार्डियोग्राफी में ह्दय से गाढ़ा पदार्थ निकलने की पुष्टि हुई थी। जिससे स्पष्ट हो चुका था कि हृदय के पास में कोई जख्म है। इसके बाद उन्हें हार्ट-लंग मशीन में रखा जो हृदय और फेफड़े का काम संभालता है और कार्डियैक सर्जरी संभव होती है। निरीक्षण किया तो पता चला कि हृदय के बाईं तरफ एक इंच लंबा जख्म था। इसे नियंत्रित करने के लिए पोटाशियम इंजेक्ट किया गया और जख्म ठीक हो गया।
इमरजेंसी डॉक्टर बचा सकते हैं जान
अस्पताल के वरिष्ठ ह्दय रोगविशेषज्ञ डॉ. महेश गर्ग बताते हैं कि इस तरह की बीमारी में मरीज को सबसे पहले जरूरत इमरजेंसी केयर की होती है। ताकि तत्काल जांच से मरीज की सटीक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सके। उनका कहना है कि मरीज को कम समय में बेहतर उपचार देना ही इस केस की बड़ी चुनौतियों में से एक है।