आरोपी ने वर्ष 1985 में अलीगढ़ यूनिवर्सिटी से अरबी में एमए किया था। यहां पर सिमी कार्यकर्ताओं के संपर्क में आकर ये कट्टरपंथी बन गया। संगठन में शामिल होने के बाद ये सिमी के कार्यक्रमों में शामिल होने के अलावा युवकों को जेहादी बनाने लगा। तत्कालीन सिमी अध्यक्ष अशरफ जाफरी ने इसे सिमी की मैगजीन के हिंदी वर्जन का संपादक बना दिया था। ये चार वर्ष तक संपादक रहा। इसने भारत में मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार जैसे काफी लेख मैगजीन में लिखे। जामिया नगर में पुलिस दबिश के दौरान ये फरार हो गया था।
अब्दुल्ला कई आतंकियों के संपर्क में था
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार जामिया नगर से फरार होने के बाद अब्दुल्ला अलीगढ़ गया। अब्दुल्ला वहां आतंकी अबदुश सुभान कुरैशी उर्फ तौकीर, दूसरे आतंकी अबू बशर से मिला था। अब्दुल्ला ने इनको भारत सरकार के खिलाफ देशविरोधी गतिविधियों के लिए उकसाया था। इन दोनों आतंकियों ने अपने अन्य साथियों की मदद से वर्ष 2008 में सीरियल बम धमाके किए थे।
सीरियल बम धमाकों के बाद अबू बशर अलीगढ़ में अब्दुल्ला के घर रूका था। अब्दुल्ला के कहने पर ही इन आतंकियों ने केरल में सिमी के आतंकी ट्रेनिंग कैंप शुरू किए थे। अब्दुल्ला ने स्वीकार किया है कि वह यूपी, एमपी व गुजरात में जाकर युवकों को जेहादी बना चुका है।
माता-पिता ने किया था धर्म परिवर्तन
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार अब्दुल्ला ने बीए शिवली कॉलेज, आजमगढ़ यूपी से किया था। इस दौरान इसके माता-पिता ने हिंदू से मुस्लिम धर्म अपना लिया। ऐसे में अब्दुल्ला ने भी धार्मिक मुस्लिम साहित्य को पढ़ना शुरू कर दिया। धर्म परिवर्तन के बाद ये मदरसों में जाने लगा। इसके बाद वर्ष 1985 में अलीगढ़ से एमए किया और सिमी के सदस्यों के संपर्क में आया।