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Delhi : सिसोदिया की रिहाई से आप को मिली संजीवनी, अब पार्टी की सियासत और चुनावी रणनीति के केंद्र में होंगे मनीष

Sat, 10 Aug 2024 05:29 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

साल के अंत तक दिल्ली और हरियाणा में विधान सभा चुनाव होने हैं। ऐसे में मनीष सिसोदिया आप की चुनावी रणनीति के केंद्र में होंगे।
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मनीष सिसोदिया - फोटो : AMAR UJALA
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विस्तार
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दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को जेल से मिली रिहाई से आम आदमी पार्टी को संजीवनी मिली है। साल के अंत तक दिल्ली और हरियाणा में विधान सभा चुनाव होने हैं। ऐसे में मनीष सिसोदिया आप की चुनावी रणनीति के केंद्र में होंगे। अगर इस बीच मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जेल से बाहर नहीं आते तो दोनों राज्यों में प्रचार अभियान की कमान सिसोदिया के हाथ में रहेगी। पार्टी नेता भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री संदीप पाठक ने माना कि सिसोदिया पार्टी का नेतृत्व करेंगे।

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दरअसल, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बाद सिसोदिया पार्टी का सबसे चर्चित चेहरा हैं। इनके साथ मुख्यमंत्री के जेल में चले जाने से पार्टी मुश्किल दौर में चली गई। इससे कार्यकर्ताओं का आत्म विश्वास भी कम हो गया था। इसी दौरान पार्टी नेताओं के आपसी मनमुटाव भी सामने आए। पार्टी की सबसे खराब हालात सांसद स्वाति मालीवाल के साथ कथित मारपीट के मामले में दिखी। लोक सभा चुनाव के दौरान हुए इस वाकये ने आप को संकट में डाला। मनीष सिसोदिया के बेल पर जेल से बाहर आने के बाद पार्टी नेताओं के साथ कार्यकर्ताओं में भी उम्मीद जगी है कि आप एक बार फिर मजबूती से खडी होगी। इसमें कार्यकर्ताओं का मनोबल भी मजबूत होगा। इससे आप की मौजूदा स्थिति से निराश कार्यकर्ताओं के भी एकजुट होने उम्मीद है। जमीनी स्तर का कार्यकर्ता आप से एकजुट होगा।

वहीं, पार्टी में नंबर दो की हैसियत रखने वाले सिसोदिया आप नेताओं के साथ-साथ विपक्षी दलों के नेताओं के बीच भी मजबूत कड़ी के तौर काम करेंगे। यह इसलिए भी अहम है कि अगले छह महीनों के दौरान हरियाणा और दिल्ली के विधान सभा चुनाव होने हैं। इस बीच अगर अरविंद केजरीवाल बाहर नहीं निकल पाते तो सिसोदिया दोनों राज्यों में पार्टी का चेहरा होंगे। आप के चुनावी अभियान की बागड़ोर सिसोदिया के हाथ में होगी।
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केजरीवाल चाहेंगे, तभी सरकार में बदलाव मुमकिन
पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के जेल से बाहर आने के बाद दिल्ली सरकार में बदलाव दिख सकता है। सिसोदिया को पहले की तरह उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसमें अड़चन जेल में बंद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सहमति मिल पाने में है। जेल नियमों के हिसाब से केजरीवाल किसी भी तरह के आधिकारिक दस्तावेज पर दस्तखत नहीं कर सकते हैं। जबकि संवैधानिक प्रावधानों के हिसाब से कैबिनेट में शामिल करने की सिफारिश मुख्यमंत्री के जरिए ही उपराज्यपाल तक जानी है।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषक व डीयू के रामजस कॉलेज के प्रो. तनवीर एजाज का कहना है कि मुख्यमंत्री की सहमति से ही मंत्रिमंडल में कोई बदलाव हो सकता है। मुख्यमंत्री अभी जेल में हैं। ऐसी सूरत में अगर कोई प्रस्ताव सरकार की तरफ से उपराज्यपाल की तरफ भेजा जाता है तो वह इस मामले में कानूनी सलाह ले सकते हैं। इसकी वजह यह है कि जीएनसीटीडी एक्ट 2021 में उपराज्यपाल को सरकार कहा गया है। इनका मानना है कि संभव है कि दिल्ली कैबिनेट की अनौपचारिक बैठक में इससे जुड़ा कोई प्रस्ताव पास कर दिया जाए। लेकिन यह प्रस्ताव भी तभी आगे बढ़ सकेगा, जब मुख्यमंत्री इस पर अपनी औपचारिक सहमति देंगे।

रिहाई लंबी खिंचने पर दे सकते हैं इस्तीफा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बेल मिलने में देरी और चुनाव नजदीक होने से संभव है कि केजरीवाल इस्तीफा दे दें। ऐसी सूरत में नई सरकार का गठन हो सकता है। इसमें नंबर दो माने जाने वाले सिसोदिया दिल्ली के मुख्यमंत्री हो सकते हैं। लेकिन यह भी मुख्यमंत्री के ही विवेक पर निर्भर करेगा। उधर, पार्टी ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे को सिरे खारिज किया है।

सिसोदिया के पास थे 18 विभाग
मनीष सिसोदिया के जेेल में बंद होने के समय उनके पास 18 विभाग थे। उनके त्याग पत्र दे देने के बाद ये विभाग सौरभ भारद्वाज, आतिशी, कैलाश गहलोत में बांट दिए गए थे। हालांकि कुछ विभाग राजकुमार आनंद को भी दिए गए थे। सिसोदिया के पास शिक्षा, वित्त, योजना, आबकारी, भूमि और भवन, सेवाएं, पर्यटन, कला-संस्कृति और भाषा, जागरूकता, श्रम और रोजगार, लोक निर्माण विभाग के अलावा स्वास्थ्य, उद्योग, बिजली, गृह, शहरी विकास, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण व जल विभाग थे।
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