दिल्ली के मास्टर प्लान-2047 में शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने का व्यापक खाका तैयार किया गया है। राजधानी में शिक्षा को केवल स्कूल और कॉलेज तक सीमित रखने के बजाय शुरुआती शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा, शोध, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और नए कारोबार से जोड़ने की योजना है। स्कूलों में पढ़ाई के साथ खेल, कला और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए अधिक जगह उपलब्ध होगी। विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए अलग स्कूल और प्रशिक्षण केंद्र बनाए जा सकेंगे। वहीं कॉलेज, विश्वविद्यालय और शोध संस्थानों को अधिक निर्माण क्षमता देने का प्रावधान किया गया है।
दिव्यांग बच्चों के लिए अलग स्कूल और प्रशिक्षण केंद्र
विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए अलग स्कूल और प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जा सकेंगे। विशेष स्कूल के लिए कम से कम 2,000 वर्गमीटर जमीन, अधिकतम 50 प्रतिशत जमीन पर निर्माण और 120 एफएआर की अनुमति होगी। सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 18 मीटर और भवन की अधिकतम ऊंचाई 18 मीटर होगी। इन संस्थानों में पढ़ाई के साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण और खेल की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। नई और मौजूदा सभी स्कूल इमारतों में दिव्यांगजन अधिकार कानून के प्रावधानों का पालन करना जरूरी होगा। इसके अलावा आवासीय स्कूल खोलने का भी प्रावधान किया गया है।
कॉलेज और शोध संस्थानों को ज्यादा निर्माण क्षमता
कॉलेज, शोध एवं विकास केंद्र और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए कम से कम 1,000 वर्गमीटर जमीन या संबंधित मान्यता देने वाली संस्था का मानक, जो भी अधिक हो, लागू होगा। इन संस्थानों में अधिकतम 40 प्रतिशत जमीन पर निर्माण और 225 एफएआर की अनुमति होगी। सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 18 मीटर रखी गई है। इन परिसरों में पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं, कार्यशालाएं, खेल मैदान, इनडोर खेल सुविधाएं, सभागार और छात्रावास बनाए जा सकेंगे। विद्यार्थियों और जरूरी कर्मचारियों के आवास की व्यवस्था भी परिसर में की जा सकेगी।
विश्वविद्यालयों के लिए एफएआर 225, खेल और हरियाली 30 प्रतिशत जमीन पर
विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा केंद्रों के लिए अधिकतम 225 एफएआर का प्रावधान है। इनके लिए सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 24 मीटर होगी और जमीन का आकार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के मानकों के अनुसार तय किया जाएगा।
विश्वविद्यालय परिसर की कुल जमीन का 15 प्रतिशत हिस्सा खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए तथा अलग 15 प्रतिशत पार्क और हरियाली के लिए रखना होगा। इस तरह बड़े शिक्षण परिसरों में पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों के लिए खेल और खुले स्थान सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
नरेला बनेगा दिल्ली का नया शिक्षा और शोध केंद्र
नरेला में 138 हेक्टेयर क्षेत्र में बड़ा शिक्षा केंद्र विकसित करने की योजना है। यहां विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के साथ कौशल प्रशिक्षण केंद्र और नए कारोबार शुरू करने वालों के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य शिक्षा को शोध, कौशल, नवाचार और रोजगार से जोड़ना है। यहां सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के अलावा अन्य शैक्षणिक और शोध संस्थानों को जगह मिल सकेगी।
शिक्षा और सार्वजनिक परिवहन का भी होगा मेल
मास्टर प्लान में करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन आधारित विकास की योजना है। मेट्रो, क्षेत्रीय रेल, रेलवे और तेज गति वाली रेल के आसपास मिश्रित और अपेक्षाकृत घना विकास किया जाएगा। इन क्षेत्रों में आवास और कारोबार के साथ शिक्षा तथा अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को भी जगह दी जाएगी। इससे शिक्षण संस्थानों और विद्यार्थियों के बीच सार्वजनिक परिवहन की बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने में मदद मिल सकती है। शिक्षा केंद्रों को परिवहन नेटवर्क से जोड़ने से दूर के इलाकों से आने वाले छात्रों के लिए आवागमन भी आसान होगा।
शिक्षा में गुणवत्ता और शोध सुविधाओं पर भी हो जोर
मास्टर प्लान-2047 में दिल्ली की बढ़ती आबादी और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए शिक्षा संस्थानों के विस्तार और उन्हें बेहतर बनाने के प्रावधान स्वागत योग्य हैं। लेकिन केवल नए संस्थानों के लिए जमीन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना भी योजना का अहम हिस्सा होना चाहिए। उच्च शिक्षा के लिए पीजी और हॉस्टल की पर्याप्त व्यवस्था जरूरी है, ताकि बाहर से आने वाले विद्यार्थियों को आवास की समस्या न हो। दिल्ली को शिक्षा और शोध का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए विश्वविद्यालयों व शोध संस्थानों को पर्याप्त अनुदान, आधुनिक प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात सुधारने पर भी ध्यान देना होगा।