दिल्ली में यमुना के सक्रिय फ्लड प्लेन की सीमा 25 साल में आई सबसे बड़ी बाढ़ के आधार पर तय की जाएगी। इसके लिए जियोस्पेशियल दिल्ली लिमिटेड (जीएसडीएल) ने 2011 में यमुना के 205.72 मीटर के अधिकतम जलस्तर को आधार बनाकर फ्लड प्लेन का नक्शा तैयार किया है। जलस्तर को राउंड ऑफ कर 206 मीटर माना गया है। जीएसडीएल ने 20 शीट में तैयार नक्शे भौतिक सत्यापन के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को भेजे हैं। डीडीए अब मौके पर इसका सीमांकन करेगा।
विशेषज्ञों ने जताया एतराज
यमुना की जमीन यमुना की है। फ्लड प्लेन में किसी तरह की गतिविधि की इजाजत नहीं दी जा सकती। इसका बंटवारा भी नहीं होना चाहिए। मास्टर प्लान में सरकारी उपयोगिताओं, सामाजिक-सांस्कृतिक और मनोरंजक सुविधाओं तथा सार्वजनिक ढांचे के विकास की अनुमति से फ्लड प्लेन के संरक्षण पर ही सवाल खड़ा होगा। ऐसा हुआ तो मास्टर प्लान यमुना की बर्बादी का दस्तावेज बन जाएगा। यह एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के नदी संरक्षण से जुड़े फैसलों के खिलाफ होगा। फ्लड प्लेन के साथ रिवर फ्रंट को भी ओ-जोन में शामिल करने से आशंका बढ़ती है कि सरकारी एजेंसियां अपनी सुविधा के हिसाब से क्षेत्र तय करेंगी। 2021 के मास्टर प्लान के विपरीत इसमें बाढ़ क्षेत्र का क्षेत्रफल स्पष्ट नहीं किया गया है।
-राजेंद्र सिंह, जल पुरुष
फ्लड प्लेन का भौतिक सत्यापन होना चाहिए। इसके बिना नदी की हद तय नहीं की जा सकती और अतिक्रमण जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। फ्लड प्लेन तय करने का आधार 100 साल की बाढ़ होना चाहिए। 25 साल की बाढ़ के आधार पर पर्याप्त स्पष्टता नहीं आएगी। पिछले मास्टर प्लान में बाढ़ क्षेत्र करीब 9,700 हेक्टेयर बताया गया था, जबकि मास्टर प्लान-2047 में इसे तय करने की जिम्मेदारी सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग पर डाल दी गई है। ओ-जोन के विभाजन की बात भी हो रही है। ऐसा हुआ तो यमुना शुद्धीकरण का मकसद ही संदिग्ध हो जाएगा।