यमुना की अविरलता और निर्मलता के लिए नर्मदा मिशन के संस्थापक अवधूत दादा गुरु ने शनिवार से दिल्ली से मथुरा के लिए पद यात्रा शुरू की। नदी के साथ-साथ नौ दिन तक चलने वाली इस यात्रा में आम लोगों में जागरूकता फैलाई जाएगी। वहीं, यमुना के शुद्धिकरण के लिए आईटीओ छठ घाट पर पांच कुंडीय यज्ञ भी हुआ। अखिल भारतीय गायत्री परिवार ने इस दौरान जल देवता वरुण को आहुति दी।
दादा गुरु ने कहा कि हम यमुना जी के उसी पर के यात्री बन रहे हैं, जिस पथ के पथिक कभी भगवान श्रीकृष्ण बने थे। इस पर चलने से जीवन की दिशा व दशा में सुधार होता है। हमें समझना होगा कि यमुना के बिना गांव व शहर में जीवन नहीं बचेगा। जब यमुना के द्वार सुरक्षित रहेंगे, यमुना बचेगी, तभी दिल्ली भी सुरक्षित होगी। यह वक्त की मांग है कि यमुना का स्वच्छ बनाएं। इसके लिए हमें नदी के निकट जाना पड़ेगा। राष्ट्रवादी चिंतक केएन गोविंदाचार्य ने कहा कि समाज में चेतना, समझ और आग्रह बढ़ने की जरूरत है। तभी गंगा जी, यमुना जी और देश की नदियां अविरल बहेंगी, निर्मल रहेंगी। इसमें धर्म सत्ता की बड़ी अहमियत रही है।
आयोजक यमुना संसद ने बताया कि यमुना सेवा पद यात्रा नौ दिन की है। पहले दिन कालिंदी कुंज में विश्राम हुआ। रविवार दादा गुरु फरीदाबाद में रहेंगे। आगे मथुरा में पांच नवंबर को यात्रा का समापन होगा। कार्यक्रम में यमुना बाबा हरिदास, कथा वाचक अजय भाई, संतूर वादक अभय सोपोरी, लक्ष्मी बाई कालेज की प्रिंसिपल प्रो. प्रत्यूष वत्सला, समाज सेवी कन्हैया गर्ग नदी संवाद के संयोजक जीव कांत झा, नमामि गंगे के भरत पाठक समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।