दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इस मामले में पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड से घर खरीदने वाले वरुण देव को 46,28,933 रुपये लौटाने के लिए भी निर्देश दिए हैं। इस रकम का भुगतान वरुण देव ने पार्श्वनाथ बिल्डर्स को गाजियाबाद में एक फ्लैट के लिए किया था।
देव द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, गाजियाबाद में कंपनी की पार्श्वनाथ इग्जोटिका नाम की परियोजना के तहत वरुण ने एक फ्लैट के लिए 2008 में बिल्डर्स के साथ सौदा किया था। वर्ष 2009 में वरुण देव जब साइट पर गए तो देखा कि वहां किसी तरह का निर्माण कार्य नहीं हो रहा है। इसके बाद उन्होंने कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
सुनवाई करने वाली बेंच में शामिल न्यायिक सदस्य एनपी कौशिक ने कंपनी की दलील को नहीं माना। कंपनी ने कहा था कि मंदी के कारण उसकी कई परियोजनाओं का कार्य धीमा पड़ गया था। कौशिक ने कहा कि कंपनी ने इसके पक्ष में कोई भी सबूत ऑन रिकॉर्ड नहीं प्रस्तुत किया है कि हकीकत में वैश्विक मंदी के कारण ही उनकी परियोजना पूरी नहीं हो सकी थी। शिकायत कर्ता ने आयोग के समक्ष कहा था कि बिल्कुल समय पर किश्तों के रूप में कंपनी को 46,28,933 रुपये चुका दिए थे।
हर्जाना भी लगाया
आयोग ने कंपनी से मुकदमे के खर्च के रूप में वरुण को 25,000 रुपये चुकता करने का भी निर्देश दिया है। कंपनी ने आयोग के समक्ष यह भी दलील दी थी कि विभिन्न सरकारी प्राधिकरणों के कारण भी निमार्ण कार्य में देरी हुई। आयोग ने कंपनी के इन तर्कों को भी खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि कंपनी इन दलीलों के सबूत सौंपने में नाकाम रही है।