यूपी बोर्ड से 12 वीं की परीक्षा पास करने वाले 11794 छात्रों की आंखों में अब एक ही सपना तैर रहा है, वो ही आगे की पढ़ाई के लिए बेहतर कॉलेज मिल जाए ताकि अच्छी नौकरी की संभावनाएं बन सकें। चूंकि दिल्ली यूनिवर्सिटी में यूपी बोर्ड के छात्रों की राह आसान नहीं है, ऐसे में इन छात्रों की छात्रों के लिए डिग्री कॉलेज ही प्राथमिकता में है।
इस बार सीबीएसई बोर्ड की ऑल इंडिया टॉपर के 98.8 प्रतिशत और काउंसलि फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (सीआईएससीई) में आईएससी में 100 प्रतिशत रिजल्ट रहा है। वहीं, 95 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले छात्रों का भी आंकड़ा बहुत ज्यादा है। इस वजह से यूपी बोर्ड के छात्रों के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी की राह आसान नहीं है।
जिले में डिग्री कॉलेज में भी ज्यादा सीटें नहीं हैं। यहां पर बीए प्रोग्राम में लगभग 320, बीकॉम में 120 और बीएससी मैथ्स और बॉयोलॉजी में मिलाकर 180 सीटें हैं। जिले में इस बार 15407 विद्यार्थियों ने 12 वीं की परीक्षा दी थी, जिनमें से 11794 उत्तीर्ण हुए। इनमें से 5670 लड़के और 6124 लड़कियां हैं।
पास आउट छात्र परेशान हैं कि उनको दाखिला कहां मिलेगा। इसलिए अभी से जुगाड़ लगा रहे हैं। निजी यूनिवर्सिटी में पढ़ने की क्षमता नहीं
छात्र मनीष ने बताया कि उसके 12 वीं में 75 प्रतिशत अंक आए हैं। इतने अंकों में सरकारी कॉलेज में भी दाखिला मिलना मुश्किल है।
इतना पैसा नहीं है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी में दाखिला ले सकें। इंजीनियरिंग के लिए आवेदन किया था, लेकिन वो क्लियर नहीं हो पाया है। ऐसे में प्राइवेट ही पढ़ाई करने का सोच रहे हैं। वहीं कामिनी शर्मा ने बताया कि उसके 12 वीं में 79 प्रतिशत अंक आए हैं।
वो हिंदू कॉलेज में पढ़ाई करना चाहती हैं, लेकिन वहां दाखिला मिलना मुश्किल है। टॉपर को मनपसंद कॉलेज में दाखिला मिलना मुश्किल
जिले की टॉपर के 83.8 प्रतिशत अंक आए हैं। उसे भी दिल्ली यूनिवर्सिटी के टॉप कॉलेजों में दाखिला मिलना मुश्किल लगा रहा है। जब टॉपर की राह आसान नहीं है तो अन्य छात्रों के लिए भी दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिला आसान नहीं है।
मेट्रो की नजदीकी से डिग्री कॉलेज को प्राथमिकता
बादलपुर में लड़कियों का राजकीय डिग्री कॉलेज बना हुआ है, लेकिन वो बहुत दूर है। ऐसे में लड़कियां वहां पढ़ने से बचती हैं। सभी विद्यार्थी सेक्टर - 39 में मेट्रो कनेक्टिविटी होने के कारण यहां दाखिले को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन यहां पर भी इस बार कटऑफ ऊंची रह सकती है।
ग्रेटर नोएडा रूट पर मेट्रो शुरू होने के बाद डिग्री कॉलेज में आवेदन करने वाले छात्रों की संख्या इजाफा हुआ है। ऐसे में कटऑफ पर साफ असर दिखाई दे सकता है।
डिग्री कॉलेज की सीटें
बीए - 320
बीकॉम 120
बीएससी 180
डिग्री कॉलेज में नहीं प्रोफेशनल कोर्स
डिग्री कॉलेज में परंपरागत कोर्स होते हैं। यहां पर प्रोफेशनल कोर्स नहीं होते हैं। इससे भी छात्रों को कई बार जॉब ढूंढने में मुश्किल आती है।
डीयू के अलावा और भी हैं विकल्प
जिन विद्यार्थियों का दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिला नहीं हो पा हा है उनको निराश होने की जरूरत नहीं है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के अलावा भी बहुत सारे विकल्प हैं, जहां पर दाखिला ले सकते हैं। प्रोफेसर आर के गुप्ता ने बताया दिल्ली यूनिवर्सिटी के अलावा भी बहुत सारे विकल्प हैं। किसी भी यूनिवर्सिटी से स्नातक करने के बाद आगे एक जैसे ही मौके मिलते हैं। ऐसे में छात्रों को आपनी सोच को संकीर्ण नहीं करना चाहिए। चाहे तो किसी राज्य की स्टेट यूनिवर्सिटी में दाखिला ले सकते हैं।
जिले के छात्रों के लिए विकल्प
- इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी
- उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय
- गाजियाबाद में भी चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के बहुत सारे कॉलेज हैं, वहां पर दाखिला ले सकते हैं। जैसे एमएमएच गाजियाबाद, शंभु दयाल कॉलेज, वीएमएलजी कॉलेज, मान्यवर काशीराम गर्वमेंट डिग्री कॉलेज।