रियो पैरालंपिक में रजत पदक जीतने वाली देश की पहली महिला एथलीट दीपा मलिक का इन दिनों सोशल साइट्स पर खुमार छाया है। ये ओलंपियन सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है।
इसकी वजह खेल रत्न और इन्हें मिलने वाला सम्मान है। 45 वर्षीय दिव्यांग दीपा अब युवाओं के लिए रोल मॉडल बन गई हैं। साहस और जज्बे की नई मिसाल और हिम्मत के तौर पर उन्हें पेश किया जा रहा है।
खेल विभाग इन्हें ब्रांड अंबेस्डर के तौर पर पेश करने की तैयारी कर रहा है। दीपा का रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर की वजह से कमर के नीचे का हिस्सा काम नहीं करता है, लेकिन इसके बावजूद वह हिम्मत नहीं हारीं।
अर्जुन अवॉर्ड विजेता दीपा कमर के नीचे से लकवा ग्रस्त हैं। लकवा ग्रस्त होने के छह वर्ष के बाद पैरा खेलों में उतरने का निर्णय लिया था। अब पैरालंपिक वूमेन शॉर्ट पुट इवेंट एफ-53 में 4.63 मीटर सर्वश्रेष्ठ देने के साथ एक मिसाल दुनिया के सामने पेश की।
फेसबुक, ट्विटर पर अन्य नेटवर्किंग साइट्स पर इनसे जुड़ी बातें ट्रेंड कर रही हैं। बता दें कि जीतने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर सभी प्रतिष्ठित लोगों ने ट्वीट किया था।
गुड़गांव बेस्ड स्टार्टअप फाउंडर श्रीकांत यादव ने लिखा कि अब खेलों की ओर भी ध्यान देना होगा। देश में कई दिव्यांग खिलाड़ी हैं, जो अपनी जिंदगी को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, इससे उन्हें प्रेरणा मिलेगी। केआर मंगलम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आरके सिंह ने लिखा कि दीपा ने पैरालंपिक के साथ दिव्यांग की परिभाषा बदल दी है।