आखिर दिल्ली गुड़गांव एक्सप्रेस वे टोल प्लाजा के मामले में सभी पक्षों के बीच समझौता हो गया है। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई), दिल्ली-गुड़गांव सुपर कनेक्टिविटी लिमिटेड (डीजीएससीएल) व इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी (आईडीएफसी) ने हाईकोर्ट को यह जानकारी दी।
न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह ने सभी पक्षों को समझौते का प्रारूप शपथ पत्र सहित मंगलवार को दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि समझौते संबंधी दस्तावेज को अदालती रिकॉर्ड पर लिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार इस समझौते के अनुसार दिल्ली-गुड़गांव के बीच आने वाले सिरहौल टोल प्लाजा को समाप्त कर दिया जाएगा। यदि निर्णय समझौते के अनुरूप ही रहा तो लाखों लोग टोल चुकाए बगैर ही दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेस वे पर फर्राटा भर सकेंगे।
एनएचएआई व डीजीएससीएल के बीच टोल प्लाजा के संबंध में मिलने वाली शिकायतों के बाद कानूनी विवाद खड़ा हो गया था। एनएचएआई ने टोल प्लाजा हटाने के लिए डीजीएससीएल को नोटिस जारी किया था। एनएचएआई को यह पता चला था कि डीजीएससीएल ने आईडीएफसीआई व दूसरे वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेने में कई अनियमितताएं बरतीं।
अदालत सभी पक्षों को कई बार विवाद सुलझाने के लिए मौका प्रदान कर चुकी है। डीजीएससीएल ने अदालत को बताया था कि कंपनियों के बीच कई मुद्दों पर 90 फीसदी सहमति बन चुकी है। सहमति पत्र तकरीबन तैयार हो चुका है।
इसके बाद 12 फरवरी को आईडीएफसी के अधिवक्ता हरीश साल्वे व एनएचएआई ने कहा कि समझौते के आसार कम हो गए हैं। अत: मामले की सुनवाई की जाए। अब एक बार फिर सभी पक्षों ने समझौते का तर्क रख दिया।