प्रदेश में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए उपद्रव और सांप्रदायिक हिंसा के विरोध में रविवार को एनएच-5 स्थित मंदिर श्री बांके बिहारी में पंजाबी समाज सहित अन्य बिरादरियों की बैठक हुई।
इसमें सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि भविष्य में कभी भी 35 बिरादरियां किसी जाट उम्मीदवार को वोट नहीं देंगी। मंदिर के प्रधान ललित गोस्वामी ने कहा कि विपक्षी दलों को पंजाबी मुख्यमंत्री हजम नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा कि जाट नेता ओमप्रकाश चौटाला और भूपेंद्र हुड्डा ने हरियाणा पर 10-10 वर्ष राज किया। अगर इन्हें आरक्षण चाहिए था तो तब लेते।
आरक्षण की आड़ में लूटपाट, तोड़फोड़, आगजनी व सामूहिक दुष्कर्म की पंजाबी बिरादरी सहित 35 बिरादरियां एकजुट होकर आज यह शपथ लेती हैं कि भविष्य में किसी जाट नेता को वोट नहीं देंगे।
गोस्वामी ने कहा कि आरक्षण आंदोलन की आड़ में लोगों ने 1947 और 1984 से भी ज्यादा घिनौना काम किया है। इतने बड़े आंदोलन को पुलिस मूकदर्शक बनकर देखती रही। सिपाही से लेकर अधिकारी तक 70 प्रतिशत लोग इसी बिरादरी के इस महकमे में हैं। सरदार मोहन सिंह भाटिया ने कहा कि 35 बिरादरियां ईश्वर की सौगंध लेकर प्रण करती हैं कि वे जाट नेताओं का बहिष्कार करेंगे।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि यह उपद्रव हरियाणा में जाट आरक्षण पर नहीं अपितु नॉन जाट मुख्यमंत्री को पद से हटाने के लिए किया गया था। इस पूरे घटनाक्रम की सीबीआई जांच होनी चाहिए और दोषी लोगों को हवालात में पहुंचाना चाहिए। उनका यह भी कहना था कि मुरथल की घटना ने प्रदेश का सिर शर्म से झुका दिया है।