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लापता ICAS अधिकारी का शव मिला, अधिकारी ने किया था सुसाइड

Fri, 15 Dec 2017 10:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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ias jitendra - फोटो : अमर उजाला
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द्वारका साउथ इलाके में सोमवार से लापता मानव संसाधन विकास मंत्रालय में तैनात आईसीएएस (इंडियन सिविल अकाउंटस सर्विसेज) अधिकारी जितेंद्र कुमार झा(40) का शव रेलवे ट्रैक से बरामद हुआ है।
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पुलिस उपायुक्त का दावा है कि जितेंद्र ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दी है। सोमवार से लापता जितेंद्र का शव मंगलवार को पालम के पास रेलवे ट्रैक से ही बरामद हो गया था, लेकिन रेलवे पुलिस व स्थानीय पुलिस में तालमेल नहीं होने के कारण बृहस्पतिवार को शव की पहचान हो सकी।

शुरू में शव की हालत देखकर परिजन पहचान करने से इनकार कर रहे थे, बाद में उन्होंने शिनाख्त की। पुलिस को एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें उन्होंने मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। शुक्रवार को शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
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द्वारका जिला पुलिस उपायुक्त शिबेश सिंह ने बताया कि 1998 बैच के आईसीएएस अधिकारी जितेंद्र कुमार झा परिवार के साथ द्वारका सेक्टर-9 में रहते थे। इनके परिवार में पत्नी भावना व दो बच्चे हैं।
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हर पांच-छह माह में हो जाता था  तबादला 

युवक ने अस्पताल में तोड़ा दम - फोटो : demo
जितेंद्र मानव संसाधन मंत्रालय में तैनात थे। फिलहाज वह इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन से ट्रेनिंग कर रहे थे। सोमवार सुबह जितेंद्र अपने दोनों बच्चों को स्कूल छोड़कर घर वापस आए और अपना फोन छोड़कर घर से निकल गए।

पत्नी ने सोचा शायद जितेंद्र ट्रेनिंग पर चले गए हैं। दिन में उन्हें कॉल करने का प्रयास किया तो पता चला कि जितेंद्र का फोन घर पर ही है। इधर देर रात तक पता नहीं चलने पर मामले की सूचना द्वारका साउथ पुलिस को दी गई।

शुरु आती जांच के बाद पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी। अगले दिन रेलवे पुलिस को पालम के पास रेलवे ट्रैक से पांच-छह टुकड़ों में एक शव बरामद हुआ। पुलिस ने शव को पहचान के लिए मोर्चरी में सुरक्षित रखवा दिया। इधर द्वारका साउथ थाना पुलिस बृहस्पतिवार को शव को जितेंद्र के रूप में लिंक कर पाई। 

जितेंद्र के परिजनों का आरोप है कि जितेंद्र बेहद ईमानदार अधिकारी थे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय से पूर्व वह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में तैनात थे। परिजनों का आरोप है कि उनकी ईमानदारी के कारण उन्हें कहीं भी टिकने नहीं दिया जाता था। हर पांच छह माह बाद उनका तबादला कर दिया जाता था। इससे जितेंद्र काफी तनाव में रहते थे। परिजनों का कहना है कि यदि जितेंद्र ने सुसाइड किया है तो उसके पीछे यही कारण होगा। 
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