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DDA की वेबसाइट से स्कीम की जानकारी गायब

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डीडीए की हाउसिंग स्कीम पर ऑनलाइन लोग खूब दिलचस्पी ले रहे हैं। महज दो दिन में 18.25 लाख लोग साइट को हिट कर चुके हैं। पहले दिन साइट क्रैश हो गई थी। अब साइट ठीक कर दी गई है। लेकिन फिर भी लगातार बेवसाइट क्रैश हो जा रही है, कई बार इसपर से जानकारियां गायाब हो जा रही हैं।
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डीडीए के डायरेक्टर ऑफ सिस्टम्स वी एस तोमर ने बताया कि आमतौर पर दो से ढाई हजार लोग वेबसाइट को हिट करते हैं, लेकिन पिछले दो दिनों में 18 लाख से अधिक हिट मिले हैं।

मंगलवार को डीडीए ने यह तय किया है कि हाउसिंग स्कीम संबंधित जानकारी अब अपनी वेबसाइट पर नहीं उपलब्ध कराएगा। सर्वर पर अधिक लोड के कारण हैंग कर रहा है। बता दें कि इसके विकल्प के रूप में डीडीए ने विभिन्न बैंकाें की साइट से अपनी वेबसाइट को कनेक्ट कर दिया है। यानी डीडीए की साइट पर क्लिक करने से बैंकों का ऑप्शन दिया जा रहा है। जहां से आप फार्म डाउनलोड कर सकते हैं।
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70 हजार लोगों ने किया आवेदन

फॉर्म बिक्री के दूसरे दिन 25034 फ्लैट के लिए 70 हजार लोग आवेदन कर चुके हैं। हालांकि हाउसिंग स्कीम 2010 के समय जो दीवानगी दिखी थी वो अभी नहीं दिखाई पड़ रही है। क्योंकि तब फॉर्म बिक्री के दूसरे दिन 16,237 फ्लैट्स के लिए 2 लाख 76 हजार ग्राहक सामने आ गए थे।

डीडीए हाउसिंग स्कीम में शामिल होने के लिए मंगलवार को बड़ी संख्या में लोग डीडीए मुख्यालय पहुंचे। सुबह से शाम तक काउंटर पर भीड़ लगी रही। हाउसिंग स्कीम लॉन्च होने के दूसरे दिन 40 हजार लोगों ने आवेदन फार्म खरीदें। इनमें 17 हजार लोग डीडीए मुख्यालय पहुंचकर फार्म खरीदें तो 23 हजार लोगों ने डीडीए द्वारा अधिकृत बैंकों के ब्रांच से आवेदन फार्म खरीदें। नई दिल्ली। डीडीए हाउसिंग स्कीम से न केवल आशियाने की चाहत रखने वालों के लिए आशा बंधी है, बल्कि बैंक भी काफी आशांवित है। पिछले हाउसिंग स्कीम की तरह ही डीडीए द्वारा अधिकृत किए गए बैंक इस वर्ष भी इसे भुनाने में लगे हैं। बैंक मोबाइल पर मैसेज भी भेजने लगे हैं।

डीडीए की नई हाउसिंग स्कीम में 25 लाख आवेदन बिकने की उम्मीद है। डीडीए ने फिलहाल 15 लाख फॉर्म छपवाए हैं और 10 लाख फॉर्म छापने की बात की है। वहीं, मंगलवार को भी कई बैंकों में फॉर्म उपलब्ध नहीं है।
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हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगाने से किया इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) फ्लैट स्कीम-2014 के तहत आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित फ्लैटों को सामान्य श्रेणी में करने संबंधी डीडीए के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने याची को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि आखिर याचिका कैसे विचार योग्य है।

न्यायमूर्ति वीके शाली के समक्ष यह याचिका केशव कैंप जेजे कलस्टर डेवलपर वेलफेयर एसोसिएशन व तीन अन्य ने दायर की है। सुनवाई के दौरान याचिक के अधिवक्ता ने अदालत से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित फ्लैटों को सामान्य श्रेणी में रखने के फैसले पर रोक लगाने का आग्रह किया। अदालत ने कहा कि सभी याची 24 सितंबर तक स्पष्ट करे कि याचिका विचार योग्य है।

याचिका के अनुसार डीडीए ने अब आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित फ्लैटों को सामान्य श्रेणी में शामिल कर दिया है। याची ने कहा कि डीडीए व सरकार का निर्णय गैरकानूनी, मनमाना है। अत: इस फैसले को रद्द कर डीडीए को द्वारका के 2400 फ्लैट तय योजना के अनुसार आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लोगों को देने का निर्देश देने के अलावा सामान्य श्रेणी से इनको हटाने का निर्देश दिया जाए।
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