डीडीए हाउसिंग स्कीम ड्रॉ की प्रतीक्षा सूची भी जारी हो गई है। आवेदक डीडीए की वेबसाइट पर देख सकते हैं कि उनका नाम इस सूची में है या नहीं। इसमें 1253 आवेदकों को शामिल किया गया है। अगर आवेदक अपने आप को ड्रॉ में असफल मान रहे हैं तो उनके लिए आशा की किरण जगी है।
फिलहाल डीडीए उन्हें फार्म के साथ जमा की गई रकम लौटा देगा, लेकिन अगर उनका फ्लैट निकल आया तो उन्हें फिर से एक लाख रुपये प्राधिकरण को देना पड़ेगा।
वेटिंग लिस्ट सफल आवेदकों को मांगपत्रों के जारी होने की तिथि से केवल 9 महीने तक वैद्य होगी। गौरतलब है कि अगर सफल आवंटी अपने फ्लैट को सरेंडर करते हैं या किसी कारण से नहीं लेंगे तो वेटिंग लिस्ट में शामिल लोगों को एक बार फिर पंजीकृत राशि जमा करने को कहा जाएगी। इसके लिए सिर्फ एक बार ड्रॉ किया जाएगा।
फ्लैट्स रेडी टू मूव हैं
ड्रा होने के दूसरे दिन बुधवार को काफी संख्या में सफल आवेदक आशियाने को देखने पहुंचे। यह सिलसिला सुबह से शाम तक जारी रहा। मुखर्जी नगर स्थित एमआइजी फ्लैट्स देखने पहुंचे लोगों के खुशी का ठिकाना नहीं था।
यहां का फ्लैट्स स्कीम का सबसे बेहतर अपार्टमेंट में शुमार है। यहां के सभी फ्लैट्स रेडी टू मूव हैं। वहीं रोहिणी, द्वारका इलाके में स्थित फ्लैटों को देखने का सिलसिला भी जारी रहा।
हालांकि वहां पहुंचे लोग बिजली-पानी को लेकर परेशान दिखे। गौरतलब है कि 2010 के हाउसिंग स्कीम में भी रोहिणी सेक्टर 28-29 में चार हजार से अधिक फ्लैट लोगों को दिए गए थे। लेकिन ट्रांस्पोटेशन की कमी के कारण चार हजार फ्लैटों में एक सौ लोग भी वहां नहीं बसे है।
सक्रिय हुए प्रॉपर्टी डीलर
ड्रा निकलने के साथ ही प्रॉपर्टी डीलर भी सक्रिय हो गए हैं। कई डीलर तो मुखर्जी नगर, रोहिण, द्वारका, नरेला समेत कई जगहों पर अपना डेरा भी डालना शुरू कर दिया। इसके साथ ही डीडीए मुख्यालय में भी पहुंचकर सफल आवेदकों से खरीद-बिक्री की बात करने लगे है। बुधवार को डीलर अपना फोन नंबर भी बांटते नजर आए।
पांच साल की पाबंदी के बाद भी राह निकाली
डीडीए ने भले ही पांच साल तक खरीद-बिक्री पर पाबंदी के साथ हाउसिंग स्कीम की घोषणा की लेकिन डीलरों ने इसका भी रास्ता निकाल लिया है। डीलरों का कहना है कि दिल्ली की आधी आबादी पावर ऑफ अटॉर्नी पर बसी है।
आधी आबादी के घर की अभी भी रजिस्ट्री नहीं हुई है, लिहाजा पावर ऑफ अटॉर्नी पर फ्लैटों की खरीद-बिक्री संभव है। इनकी दलील है कि पांच साल तक भले ही फ्लैट नहीं बिके, लेकिन किराये पर तो लग ही सकता है और पांच साल बाद ऊंची कीमत पर भी बिक सकती है।