इस श्रेणी के तहत फ्री होल्ड के दायरे में आने वाली दुकानों के मालिक/यूनिट धारक अब डीडीए से अपने पक्ष में अपार्टमेंट डीड प्राप्त कर सकते हैं। इसके आधार पर उन्हें पट्टेदार (स्वामीत्व) के रूप में मान्यता दी जाएगी। इसके साथ ही यूनिट धारकों/दुकानदारों को अपनी यूनिट फ्री होल्ड करने के लिए बिल्डर/डेवलपर की दया पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
इसके साथ ही दुकानदारों को अपनी संपत्ति को फ्री होल्ड करवाने के लिए बिल्डरों द्वारा दी जाने वाली एनओसी के लिए के चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब यह प्रक्रिया पूरी तरह डीडीए के हाथों में होगी और लोग बिना किसी परेशानी के अपनी संपत्ति को फ्री होल्ड करवाने के आवेदन कर सकेंगे।
अभी तक दुकानदारों को बिल्डरों अपनी संपत्ति का फ्री होल्ड कराने के लिए बिल्डर द्वारा दिए जाने वाले अनापत्ति पत्र (एनओसी) पर निर्भर रहना पड़ता था। डीडीए के इस आदेश के बाद एक समय सीमा तय की जाएगी, इसके भीतर अगर बिल्डर की ओर से एनओसी नहीं दिया जाता है तो बिना बिल्डर की एनओसी के डीडीए की ओर फ्री होल्ड करने की प्रक्रिया को शुरू कर दिया जाएगा।
दुकानें फ्री होल्ड ना होने की स्थिति में बिल्डर दुकानदारों से संपत्ति का ढाई प्रतिशत ग्राउंड रेंट लेते थे। डीडीए के मुताबिक, बिल्डर दुकानदारों से ग्राउंड रेंट लेकर डीडीए के पास जमा नहीं करवाते थे, लेकिन अब दुकानें फ्री होल्ड होने के बाद बिल्डर ग्राउंड रेंट वसूल नहीं कर सकेंगे। इसके साथ ही इस नीति से उन दुकानदारों को भी लाभ मिलेगा, जिनकी दुकानों की लीज खत्म हो चुकी हैं।
डीडीए ऐसे दुकानदारों को अपने पुराने दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहेगा, जिनके आधार पर मामूली शुल्क लेकर लोगों की लीज को बहाल कर दिया जाएगा। दुकान मालिक अपनी संपत्ति के आधार पर विभिन्न प्रकार के ऋण भी लेने के हकदार हो जाएंगे।
इस नीति के तहत दुकानों को फ्री होल्ड करवाने के लिए आवेदक को प्री-मेच्योर बांड के साथ डीडीए द्वारा जारी एक फार्म भरना होगा। इसके साथ ही एक शपथ पत्र भी देना होगा कि आवेदनकर्ता अपनी संपत्ति पर सभी पुराना बकाया समेत मौजूदा शुल्क देने को तैयार है। इस बकाया राशि का भुगतान करने पर, आवेदक को उसकी संपत्ति की अपार्टमेंट डीड मिल जाएगी।