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DCW की दिल्ली सरकार को सिफारिश: सरकारी अस्पतालों में यौन हिंसा पीड़ितों की एमएलसी में ना हो देरी

Tue, 04 Apr 2023 03:05 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

आयोग ने सरकारी अस्पतालों में यौन हिंसा की शिकार महिलाओं को हो रही दिक्कतों के कारणों का पता लगाने के लिए दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया था। इस प्रक्रिया में गंभीर कमियों की पहचान की गई।
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दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालिवाल - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग को दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में यौन हिंसा की पीड़ितों का चिकित्सीय परिक्षण करने में देरी को रोकने के लिए सिफारिशें दी हैं।

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एनसीआरबी की 'क्राइम इन इंडिया' रिपोर्ट 2022 के अनुसार, दिल्ली सबसे असुरक्षित महानगरीय शहर है और देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध में 15% की वृद्धि हुई है। राजधानी में रोजाना करीब 6 रेप की घटनाएं हो रही हैं।

अपराधों की खतरनाक संख्या के साथ-साथ यौन हमले की पीड़ितों द्वारा झेली जाने वाली परेशानियों को ध्यान में रखते हुए, पीड़िताओं के लिए सहायता प्रणालियों को तत्काल मजबूत किया जाना चाहिए। मगर आयोग ने देखा है कि सरकारी अस्पतालों में वन स्टॉप सेंटर ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, जिससे दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सीय परिक्षण करने में काफी देरी हो रही है।
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इस संबंध में आयोग ने सरकारी अस्पतालों में यौन हिंसा की शिकार महिलाओं को हो रही दिक्कतों के कारणों का पता लगाने के लिए दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया था। इस प्रक्रिया में गंभीर कमियों की पहचान की गई।

इन अस्पतालों में नहीं है वन स्टॉप सेंटर

यह देखा गया कि गुरु गोबिंद सिंह अस्पताल, स्वामी दयानंद अस्पताल और हेडगेवार अस्पताल जैसे कुछ अस्पतालों में वन स्टॉप सेंटर नहीं है। आयोग ने सिफारिश की है कि इनमें से प्रत्येक अस्पताल में तत्काल वन स्टॉप सेंटर स्थापित किया जाए।

यह पता चला कि ऐसे 5 चरण थे जिनमें पीड़िताओं की एमएलसी के दौरान देरी का अनुभव किया गया। ये हैं, आपातकालीन कक्ष में, पीड़िता का यूपीटी परीक्षण करते समय, स्त्री रोग विशेषज्ञ की प्रतीक्षा करते समय, नमूनों को सील करते समय और दस्तावेजीकरण प्रक्रिया के दौरान।

उदाहरण के लिए, अरुणा आसफ अली अस्पताल में यूपीटी परीक्षण वन स्टॉप सेंटर के अंदर नहीं बल्कि अस्पताल के एक अलग तल या विंग में किया जा रहा है। इसके अलावा, कलावती अस्पताल यूपीटी परीक्षण किटों को संग्रहीत नहीं करता है, और परिणामस्वरूप पीड़िता को यूपीटी परीक्षण के लिए लेडी हार्डिंग अस्पताल (जो एक किलोमीटर दूर है) जाने के लिए मजबूर किया जाता है और फिर एमएलसी के लिए कलावती के पास वापस जाना पड़ता है।
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वन स्टॉप सेंटर में हों ये सुविधाएं

आयोग ने सिफारिश की है कि पीड़िताओं को आपातकालीन कक्ष में प्रतीक्षा किए बिना सीधे वन स्टॉप सेंटर से संपर्क करने की अनुमति दी जानी चाहिए। वन स्टॉप सेंटर में शौचालय साथ में होने चाहिए और यूपीटी परीक्षणों में देरी को कम करने के लिए पीने का पानी होना चाहिए।

बलात्कार पीड़ितों का स्त्री रोग विशेषज्ञों द्वारा बिना किसी देरी के इलाज किया जाए, वरिष्ठ स्टाफ एमएलसी प्रक्रिया के दौरान सैंपल को ओएससी के अंदर ही सील करें और डॉक्टरों को दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दें।

यह भी देखा गया कि हेडगेवार और दादादेव अस्पताल जैसे अस्पतालों में कुछ डॉक्टर और कर्मचारी पीड़िताओं के साथ अशिष्ट व्यवहार करते हैं और उनसे बातचीत करते हुए पूर्वाग्रह दर्शाते हैं।
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