फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तीस हजारी बवालः कोर्ट रूम से निकलते ही डीसीपी के निकले आंसू

Mon, 04 Nov 2019 05:17 AM IST
दुष्यंत शर्मा अरुण कुमार, नई दिल्ली
विज्ञापन
बवाल के बाद - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

समय दोपहर करीब तीन बजे, हाईकोर्ट में तीस हजारी कोर्ट में हुए बवाल की सुनवाई शुरू हुई। हाईकोर्ट की कोर्ट नंबर-एक में वकीलों का भारी जमावड़ा और एक साइड में पुलिस के आलाधिकारियों की मौजूदगी रही। 

विज्ञापन


जैसे-जैसे सुनवाई आगे बढ़ती गई, पुलिस अधिकारियों का चेहरा उतरता गया। जैसे ही मामले की सुनवाई समाप्त हुई, तो कोर्ट रूम से बाहर आते ही उत्तरी दिल्ली की डीसीपी मोनिका भारद्वाज की आंखों में आंसू आ गए।

हाईकोर्ट में वकीलों और पुलिस अधिकारियों को अपना पक्ष रखने के लिए बराबर का मौका दिया गया, लेकिन जब पीठ ने घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस से सवाल पूछे तो पुलिस आत्मसुरक्षा में चली गोली के अलावा कोई दलील नहीं दे पाई।
विज्ञापन


इसके साथ ही जब पुलिस ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में एसआईटी जांच की जा रही है, घटना में शामिल एक एएसआई को निलंबित किया गया है और एक का तबादला किया गया है, तो पुलिस की इस कार्रवाई पर अदालत ने असंतुष्टि जताते हुए मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए।

इसके साथ ही अदालत ने एकाएक पुलिस के बर्बर और कथित आपराधिक रवैये पर चिंता जताते हुए दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त संजय सिंह और अतिरिक्त डीसीपी हरिंदर सिंह के तबादले के आदेश देने के साथ ही दूसरे आरोपी एएसआई को भी निलंबित करने के आदेश दिए।

चूंकि अदालत के समक्ष पुलिस के पास सफाई देने के लिए कोई अन्य पुख्ता कारण नहीं था। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादले के आदेश पर सभी पुलिस कर्मियों की चिंता और बढ़ गई। इस आदेश के साथ ही अदालत ने सुनवाई समाप्त कर दी।

सुनवाई समाप्त होते ही शाम करीब 4 बजे तीस हजारी कोर्ट क्षेत्र की डीसीपी मोनिका भारद्वाज कोर्ट रूम से बाहर निकलीं तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। इस दौरान उनके पास मौजूद अन्य अधिकारी भी उनकी हालत को देखकर परेशान हो गए। 

इस बीच डीसीपी ने अपने आंसुओं को रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह नहीं रोक पाईं। इस बीच उनके सहयोगी पुलिस कर्मी उन्हें दूसरी ओर से अदालत से बाहर ले गए। तीस हजारी कोर्ट उत्तरी जिला पुलिस के क्षेत्र में स्थित है।

विज्ञापन

कोर्ट में दोनों बड़ी घटनाओं के समय रहीं महिला डीसीपी

तीस हजारी कोर्ट में 1988 में पहली बार वकीलों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज की बड़ी घटना को अंजाम दिया गया था। 31 साल पहले हुई इस घटना के समय किरन बेदी तत्कालीन डीसीपी थीं। बीते शनिवार को पुलिस द्वारा वकील पर कथित रूप से गोली चलाने की घटना के समय भी इस क्षेत्र में डीसीपी महिला पुलिस अधिकारी मोनिका भारद्वाज हैं। तीस हजारी कोर्ट में गोली चलने की घटना दिल्ली की अदालतों के इतिहास की ऐसी पहली घटना है जब खुलेआम पुलिस के साथ हुए बवाल में वकील पर गोली चली हो।

सुनवाई से पहले बंद कमरे में हुई न्यायाधीशों की बैठक
तीस हजारी अदालत में वकीलों और पुलिस के बीच झड़प से संबंधित मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रविवार को सुनवाई शुरू करने का फैसला किया। महापंजीयक (आरजी) दिनेश कुमार शर्मा के मुताबिक, इस घटना की मीडिया रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीशों ने सुबह बंद कमरे में बैठक की। इस बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और दिल्ली सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव भी शामिल थे। इस बैठक में सुनवाई का समय तय किया गया। इस मुद्दे पर बैठक के बाद हाईकोर्ट ने केंद्र, नगर पुलिस प्रमुख, मुख्य सचिव, दिल्ली बार एसोसिएशन और दिल्ली बार काउंसिल को नोटिस जारी किया। इस बैठक से पहले भी इस मामले को लेकर शनिवार को हाईकोर्ट ने पांच घंटे से भी अधिक समय तक बैठक की। यह बैठक रात करीब 9:40 मिनट पर खत्म हुई थी। इस घटना के बाद तीस हजारी कोर्ट में पुलिस सुरक्षा बढ़ा दी गई है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें