समय दोपहर करीब तीन बजे, हाईकोर्ट में तीस हजारी कोर्ट में हुए बवाल की सुनवाई शुरू हुई। हाईकोर्ट की कोर्ट नंबर-एक में वकीलों का भारी जमावड़ा और एक साइड में पुलिस के आलाधिकारियों की मौजूदगी रही।
जैसे-जैसे सुनवाई आगे बढ़ती गई, पुलिस अधिकारियों का चेहरा उतरता गया। जैसे ही मामले की सुनवाई समाप्त हुई, तो कोर्ट रूम से बाहर आते ही उत्तरी दिल्ली की डीसीपी मोनिका भारद्वाज की आंखों में आंसू आ गए।
हाईकोर्ट में वकीलों और पुलिस अधिकारियों को अपना पक्ष रखने के लिए बराबर का मौका दिया गया, लेकिन जब पीठ ने घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस से सवाल पूछे तो पुलिस आत्मसुरक्षा में चली गोली के अलावा कोई दलील नहीं दे पाई।
इसके साथ ही जब पुलिस ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में एसआईटी जांच की जा रही है, घटना में शामिल एक एएसआई को निलंबित किया गया है और एक का तबादला किया गया है, तो पुलिस की इस कार्रवाई पर अदालत ने असंतुष्टि जताते हुए मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए।
इसके साथ ही अदालत ने एकाएक पुलिस के बर्बर और कथित आपराधिक रवैये पर चिंता जताते हुए दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त संजय सिंह और अतिरिक्त डीसीपी हरिंदर सिंह के तबादले के आदेश देने के साथ ही दूसरे आरोपी एएसआई को भी निलंबित करने के आदेश दिए।
चूंकि अदालत के समक्ष पुलिस के पास सफाई देने के लिए कोई अन्य पुख्ता कारण नहीं था। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादले के आदेश पर सभी पुलिस कर्मियों की चिंता और बढ़ गई। इस आदेश के साथ ही अदालत ने सुनवाई समाप्त कर दी।
सुनवाई समाप्त होते ही शाम करीब 4 बजे तीस हजारी कोर्ट क्षेत्र की डीसीपी मोनिका भारद्वाज कोर्ट रूम से बाहर निकलीं तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। इस दौरान उनके पास मौजूद अन्य अधिकारी भी उनकी हालत को देखकर परेशान हो गए।
इस बीच डीसीपी ने अपने आंसुओं को रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह नहीं रोक पाईं। इस बीच उनके सहयोगी पुलिस कर्मी उन्हें दूसरी ओर से अदालत से बाहर ले गए। तीस हजारी कोर्ट उत्तरी जिला पुलिस के क्षेत्र में स्थित है।