हाईकोर्ट ने आसिफ खान उर्फ आशु महाराज पर यौन शोषण, दुष्कर्म व पोक्सो की धाराओं में दर्ज मामले को खत्म करने की एवज में सात करोड़ की घूस मांगे जाने के आरोपों की जांच का निर्देश दिल्ली पुलिस को दिया है। हाईकोर्ट ने यह निर्देश मामले में एक आरोपी की जमानत याचिका के साथ पेश की गई बातचीत की सीडी व व्हॉट्सऐप चैट के विवरण पर विचार के बाद दिया है। घूस मांगने वाले का दावा था कि दाती महाराज ने 13 करोड़ की घूस अपराध शाखा के अधिकारियों को दी थी।
न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने दिल्ली पुलिस उपायुक्त से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए कहा कि इस मामले में दिल्ली पुलिस अपराध शाखा व आयकर विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता, इसलिए इन आरोपों की जांच कर दिल्ली पुलिस 16 मई तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करे।
कोर्ट के समक्ष आरोपी रवि शंकर शर्मा की जमानत याचिका पर जिरह करते हुए अधिवक्ता जेपी सिंह ने कहा कि रवि शंकर शर्मा की इस मामले में कोई भूमिका नहीं है और न उस पर यौन शोषण का आरोप है। पूरा मामला ही झूठा है और इसे पुलिस ने एक एनजीओ व बिल्डर की शिकायत पर दर्ज किया था। इस मामले को खत्म कराने के लिए आसिफ उर्फ आशु महाराज से सात करोड़ की घूस मांगी गई थी, लेकिन बातचीत के बाद पुलिस का दलाल राम नरेश शर्मा दो करोड़ पर मामले को रफा दफार करने करवाने के लिए तैयार हो गया था।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने इन आरोपों की पुष्टि के लिए राम नरेश शर्मा व आसिफ खान के निकट सहयोगी शिव कुमार के बीच हुई व्हॉट्सऐप चैट की डिटेल, मोबाइल पर बातचीत की ट्रांसक्रिप्शन व बातचीत की सीडी भी कोर्ट में पेश की। यह दलाल अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारियों को घूस देकर केस खत्म करवाने का दावा कर रहा था। यह पैसा न दिए जाने पर वह आसिफ खान व अन्य लोगों पर आयकर व ईडी की कार्रवाई होने का भी दावा कर रहा था।