ग्रेटर नोएडा के बिसाहड़ा गांव में शनिवार को हर शख्स दहशत में दिखा। यही नहीं सभी के चेहरे पर आतंक का भाव रहा। दिनभर गांव में ऐसे हालत रहे जैसे कभी भी कोई बड़ी घटना घटित हो सकती है।
शनिवार की सुबह बिसाहड़ा गांव में अंदर जाने वाले दोनों रास्तों पर सुबह से ही महिलाओं व बच्चों ने कब्जा जमा रखा था। महिलाएं वहां अड़ी थी कि कोई गांव में न घुस पाए।
जैसे ही सुबह में मीडियाकर्मी गांव में घुसने के लिए आगे आए। एकाएक उन पर पत्थरों से हमला कर दिया गया। मीडियाकर्मियों को पत्थरों से मारा गया। गाड़ियां बुरी तरह से तोड़ दी गई। इसके बाद गांव के अंदर और बाहर क्षेत्र में दहशत का माहौल कायम हो गया।
महिलाओं ने दिखाए उग्र तेवर
पुलिस की टीम गांव के अंदर और बाहर जमी रही और एक-एक पल पर नजर रखती रही। मामला तब और संवेदनशील हो गया, जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गांव में अंदर घुसने की कोशिश की।
एक बार प्रयास असफल होने के बाद दूसरी बार के प्रयास में वह गांव पहुंचे। वहां उग्र रूप धारण कर रखी महिलाओं ने एक बार तो उनसे बेहद तल्खी से बातचीत की। लेकिन वह दोबारा बात करना चाह रही थीं।
लेकिन केजरीवाल इकलाख के घर से वापसी के बाद सीधे गाड़ी में बैठ गए। इसके बाद वहां का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। महिलाओं ने एक बार फिर उग्र रुख अख्तियार करते हुए ईंटे और पत्थर उठा लिए।
पुलिसकर्मियों को करनी पड़ी मशक्कत
जो भी सामने दिख रहा था उसे धमकाते हुए पत्थर फेंके गए। मीडियाकर्मी की गाड़ियों पर फिर से पत्थर मारे गए। मीडियाकर्मियों को भागते हुए अपनी जान बचानी पड़ी।
आलम यह रहा कि केजरीवाल के साथ आए लोगों और मीडियाकर्मियों को वहां से वापसी में काफी पापड़ बेलना पड़े। लोग किसी तरह से दौड़ते भागते हुए जान बचाते दिखे।
एकाएक हुए इस हमले के बाद पुलिसकर्मियों के भी पैर फूल गए। पुलिस किसी तरह से केजरीवाल को वहां से निकाल ले गई। वहां का माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा।