सेक्टर-44 स्थित गॉर्डन ग्लोरी सोसाइटी निवासी रिद्धिमा गोयल के पास कुछ दिन पहले एक नंबर से कॉल आई। रिद्घिमा ने जैसे ही कॉल उठाई तब ऑटोमेटेड मैसेज के जरिए बताया गया कि उसके इंटरनेशनल फेडेक्स पार्सल को निरस्त कर दिया गया है। इसके बाद कॉल कस्टमर केयर के अधिकारियों को ट्रांसफर कर दी गई। यहां युवती को बताया गया कि उसके नाम से जो पार्सल विदेश जा रहा था, उसे मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़ा गया है।
पार्सल में ड्रग्स समेत अन्य आपत्तिजनक सामान है। जब युवती ने कहा कि उसने कोई पार्सल भेजा ही नहीं है तो कॉल कथित मुंबई साइबर क्राइम को ट्रांसफर कर दी गई। यहां से भी ड्रग्स होने की जानकारी दी गई और कॉल को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो मुंबई के अधिकारी को ट्रांसफर की गई। यहां से कथित जालसाजों ने नारकोटिक्स अधिकारी बनकर युवती को स्पाइक कॉल पर ले लिया। इसके बाद लगातार धमकाया गया और कथित डीजीपी से बात कराई गई। कथित डीजीपी ने महिला की छवि खराब करने की धमकी दी।
स्काइप कॉल पर करीब बीस घंटे तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया और कहा गया कि आधार कार्ड का लिंक आठ करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल किया गया है। अगर मनी लॉन्ड्रिंग केस से बचना चाहती है तो अपने अकाउंट के सारे पैसे उनके बताए गए खातों में भेज दे। इसके बाद इस अकाउंट की जांच कर अगर आरोप गलत पाए जाते हैं तो ट्रांसफर की गई रकम लौटा दी जाएगी। इसके बाद युवती ने साढ़े छह लाख रुपये खाते में ट्रांसफर कर दिए।
पांच लाख का लोन लेकर जालसाजों को भेजा
साढ़े छह लाख रुपये मिलने के बाद भी जालसाजों ने रिद्घिमा का पीछा नहीं छोड़ा। जालसाजों ने धमकाते हुए जेल जाने से बचने के लिए पांच लाख रुपये और ट्रांसफर करने के लिए कहा। युवती ने जब कहा कि उसके पास पैसे नहीं हैं तो ठगों ने पर्सनल लोन लेने के लिए कहा। महिला ने पांच लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया और ठगों द्वारा बताए गए खाते में फिर से रकम ट्रांसफर कर दी।
इसके बाद भी और रकम की मांग की गई तब उन्हें ठगी की आशंका हुई। इसके बाद साइबर क्राइम पोर्टल व साइबर थाने में शिकायत की। पुलिस मामले की जांच कर रही है और जिन खातों में रकम गई है, उन खातों के बारे में पता लगा रही है।