बाहरी उत्तरी जिला साइबर सेल ने कूरियर शुल्क वसूलने के बहाने ठगी करने वाले दो जालसाजों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने एक जालसाज को बिहार के नवादा से जबकि दूसरे को गुजरात से गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी को अंजाम दे रहे थे। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपियों ने देशभर में करीब एक हजार लोगों से करोड़ों की ठगी कर चुके हैं। पुलिस ठगी में शामिल इनके अन्य सहयोगी की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि नौ सितंबर को एक महिला ने बाहरी उत्तरी जिला के साइबर सेल में ठगी की शिकायत की। शिकायत में उसने बताया कि उन्होंने दिल्ली क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय में अपने पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था। उन्होंने पासपोर्ट की डिलीवरी के लिए गूगल पर ट्रैकिंग आईडी की जांच की, जहां से मिले एक वेबलिंक पर उन्होंने अपना विवरण दिया। इसके बाद उनके पास एक फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को इंडिया पोस्ट स्पीड पोस्ट का कर्मचारी बताया। उन्होंने बताया कि उनकी डिलीवरी पहले रद्द कर दिया गया है। इसे दोबारा पाने के लिए उन्हें पांच रुपये का भुगतान करना होगा। भुगतान के दौरान आरोपियों ने पीड़िता से करीब एक लाख रुपये ठग लिए।
साइबर सेल ने शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया। निरीक्षक रमन कुमार सिंह के नेतृत्व में जांच शुरू की। जांच में पता चला कि ठगी फर्जी वेबलिंक के जरिए अंजाम दिया गया है। पुलिस ने आरोपियों के नंबर का सीडीआर, बैंक खाते का स्टेटमेंट और केवाईसी के विवरण की जांच की। जिसके जरिए पुलिस ने नवादा बिहार निवासी अविनाश कुमार की पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से पुलिस ने दो फोन, पासबुक और चेकबुक बरामद किया।
पुलिस ने उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की। पूछताछ में उसने फर्जी वेब डिजाइनर सतीश सिंह के बारे में बताया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने पांच नवंबर को वालसाड गुजरात निवासी सतीश को गुजरात से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी गुजरात के लक्ष्मी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से स्नातक है और वेबसाइट बनाने का विशेषज्ञ है। वह फर्जी वेबसाइट बनाकर जालसाजों को मुहैया करवाता था। इसके एवज में उनसे मोटी रकम वसूलता था। पुलिस उसके कब्जे से एक फोन और लैपटॉप बरामद किया है।