साइबर सिटी (गुरुग्राम) की गारमेंट निर्माता कंपनी ब्लैकबेरी में रैनसमवेयर वायरस के हमले से दिल्ली-एनसीआर के उद्योग, कॉरपोरेट व आईटी-बीपीएम सहित तमाम अन्य प्रतिष्ठानों में बेचैनी बढ़ गई है। उन्हें भी लगने लगा है कि साइबर हमले से वह पूरी तरह से महफूज नहीं हैं। हर किसी को चिंता सता रही है कि कहीं उनके साथ ऐसा न हो जाए। साइबर विशेषज्ञों ने कहा कि जिस प्रकार से साइबर हमला करने वालों ने पासवर्ड के बदले कंपनी से बिटक्वाइन की मांग की है, यह एक गंभीर मसला है। ऐसे माहौल में साइबर सिक्योरिटी की मजबूती के लिए केंद्र-राज्य सरकारों को ठोस व्यवस्था करना चाहिए।
साइबर सुरक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि डिजिटल इंडिया का सपना बुरा नहीं है। मगर केंद्र सरकार को डिजिटल इंडिया की दीवार को साइबर हमले से बचाने का पहले इंतजाम करना चाहिए। इस मामले में देश अभी काफी पीछे है। लोगों पर पैन कार्ड और बैंक अकाउंट को आधार से लिंक करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। अगर आधार सिस्टम पर इस प्रकार का साइबर हमला हो तो लोगों की प्राइवेसी भंग होने के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी हो सकता है। हालांकि आधार की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार प्रयास कर रही है।
डेटा सिक्योरिटी से जुड़े आईटी विशेषज्ञ सचिन गुप्ता का कहना है कि रैनसमवेयर हमले के बाद पासवर्ड के बदले आर्थिक डिमांड रखना साइबर आतंकवाद का बड़ा उदाहरण है। यह मामला साइबर सुरक्षा की दिशा में सोचने के लिए मजबूर कर रहा है। अगर इसकी काट नहीं निकाली गई तो इस प्रकार के साइबर हमले और संगठित अंदाज में किए जा सकते हैं। आईटी कंपनी के एक अधिकारी का तो यह भी कहना है कि यह नए किस्म का आतंकवाद है। ठोस नहीं सोचा गया तो देश के दुश्मनों द्वारा इसका बड़े पैमाने पर फायदा उठाया जा सकता है। इस समय भारत-चीन के संबंध भी तनावपूर्ण हैं। ऐसे में चीनी हैकरों द्वारा भी इस प्रकार की हरकत की जा सकती है।
गुरुग्राम-फरीदाबाद हैकरों के निशाने पर
आईटी-बीपीएम हब गुरुग्राम और औद्योगिक नगरी फरीदाबाद हैकरों के निशाने पर हैं। गुरुग्राम में तो एससीईआरटी की वेबसाइट आईएसएस के नाम पर हैक करने की घटना घट चुकी है। अब ब्लैकबेरी कंपनी पर साइबर हमला कर उसका पूरा डेटा अपने कब्जे में हैकरों ने ले लिया है। इसे वापस करने के बदले करीब 26 लाख रुपये की डिमांड कर रहे हैं। फरीदाबाद में इंजीनियरिंग व ऑटोमोबाइल क्षेत्र की कंपनियों का हब है। यहां के बने कल पुर्जे मंगलयान तक में लगे हुए हैं। यहां बुलेटप्रूफ जैकेट का भी उत्पादन होता है। अगर इन पर साइबर हमला हुआ तो स्थिति खतरनाक हो सकती है। यही कारण है कि अब सभी जगह डर का माहौल है।
गुरुग्राम में ब्लैकबेरी पर साइबर हमला काफी गंभीर मामला है। सरकार को चाहिए कि वह देश के साइबर तंत्र को मजबूत बनाने का काम करे। आज करीब हर काम डिजिटल मोड पर आ गया है। इससे आसानी हुई है और कार्य की गति तेज हुई है । इसी के साथ-साथ ही खतरा भी बड़ा है। डेटा को सुरक्षित रखने के लिए ठोस इंतजाम बेहद जरूरी है। अब विदेशी निवेशक भी साइबर सिक्योरिटी को महत्व दे रहे हैं। वह यह देख रहे हैं कि जिस देश में उनका निवेश होगा वहां साइबर सिक्योरिटी की क्या स्थिति है।
- प्रदीप यादव, अध्यक्ष हाइटेक इंडिया
यहां-यहां हो सकता है खतरा...
-मेट्रो
-रेल
-विमानन
-बैंकिंग सेक्टर
-विभिन्न विभागों व मंत्रालयों की वेबसाइट
-राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र
-अंतरिक्ष अनुसांधान
-हॉस्पिटैलिटी
-दूरसंचार
-आईटी-बीपीएम
-इंटरनेट बैंकिंग
-ऑनलाइन सर्विस