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CSE Report: जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ी बिजली की मांग, बारिश के पैटर्न में भी बदलाव, हीट इंडेक्स में बढ़ोतरी

Sat, 28 Oct 2023 07:44 AM IST
आकाश दुबे एजेंसी, नई दिल्ली

सार

दिल्ली में अब पहले की तुलना में ज्यादा दिनों तक एसी-कूलर का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। सीएसई शोधकर्ताओं का कहना है कि ये स्थानीय रुझान प्रमुख जलवायु वैज्ञानिकों के वैश्विक निकाय, इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) के निष्कर्षों से मेल खाते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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विज्ञान व पर्यावरण केंद्र (सीएसई) की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में जलवायु परिवर्तन की वजह से बिजली की मांग बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु परिवर्तन की वजह से बारिश के पैटर्न में बदलाव आया, जिससे दिल्ली की सापेक्ष आर्द्रता और हीट इंडेक्स में बढ़ोतरी हुई है। 

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यही वजह है कि लोगों को दिल्ली में अब पहले की तुलना में ज्यादा दिनों तक एसी-कूलर का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। सीएसई शोधकर्ताओं का कहना है कि ये स्थानीय रुझान प्रमुख जलवायु वैज्ञानिकों के वैश्विक निकाय, इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) के निष्कर्षों से मेल खाते हैं।

आईपीसीसी की छठी आकलन रिपोर्ट (एआर6 डब्लूजी-आई) रिपोर्ट में कहा गया है कि शहरी केंद्रों में हीटवेव सहित चरम गरमी की सीमा बढ़ गई है, जिससे हवा का तापमान आसपास के क्षेत्रों की तुलना में कई डिग्री ज्यादा गर्म रहता है, खासकर रात के दौरान। आईपीसीसी ने चेतावनी दी है कि शहरी ताप प्रभाव स्थानीय तापमान में दो डिग्री सेल्सियस की वृद्धि कर सकता है, जिससे शहरों की अनुकूलन क्षमता कम हो सकती है और जोखिम बढ़ सकते हैं। जलवायु परिवर्तन की वजह से शहर इतने गर्म और आर्द्र हो रहे हैं कि ये रात के दौरान भी पर्याप्त रूप से ठंडा नहीं हो पा रहे हैं, जिससे गंभीर तापीय असुविधा बढ़ रही है। नतीजतन बिजली की मांग में बढ़ोतरी हो रही है।

सीएसई की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी कहती हैं कि 2018 में दिल्ली में रियल टाइम इलेक्ट्रिसिटी लोड निगरानी शुरू होने के बाद से 2023 में मानसून अवधि में औसत दैनिक अधिकतम बिजली की मांग सबसे ज्यादा रही। रॉयचौधरी के मुताबिक दिल्ली की बिजली की मांग का बाहरी तापमान और आर्द्रता की स्थिति से गहरा संबंध है। फरवरी और अक्तूबर के दौरान जब बाहरी ताप सूचकांक 17.5-22.5 डिग्री सेल्सियस (दैनिक औसत) के बीच होता है, तो मांग न्यूनतम स्तर पर होती है।
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सीएसई की रिपोर्ट में कहा गया है कि ताप सूचकांक में प्रत्येक डिग्री वृद्धि के साथ शहर में बिजली की मांग में 140-150 मेगावाट की वृद्धि होती है। यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि शहर में गर्मी की बदलती प्रकृति के कारण दिल्ली में रात में अधिक बिजली की खपत हो रही है। रात के समय बिजली की मांग का बाहरी तापमान और आर्द्रता की स्थिति के साथ गहरा संबंध है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आउटडोर ताप सूचकांक में 22.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक की प्रत्येक डिग्री वृद्धि पर रात के समय बिजली की मांग 190-200 मेगावाट तक बढ़ जाती है, जो दिन की दर से लगभग एक तिहाई अधिक है।
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