हंगामे के बीच हुए नगर निगम कार्यकारिणी समिति के चुनाव में क्रॉस वोटिंग के दम पर छह सदस्यों ने जीत हासिल कर ली। लंबी जद्दोजहद और इंतजार के बाद मंगलवार को हुए कार्यकारिणी चुनाव में सुबह से ही जमकर हंगामा हुआ।
मतगणना हुई तो दो पार्षदों के वोट बराबर आने पर भाजपा, बसपा और कांग्रेस के पार्षद भिड़ गए। मतगणना शाम 4 बजे से शुरू हुई। चुनाव समिति को रीकाउंटिंग करानी पड़ी।
काउंटिंग कराई तो नगर आयुक्त के अधिकारों को लेकर हाईकोर्ट का आदेश आ गया। इसके चलते करीब पौन घंटे तक चुनाव परिणाम की घोषणा नहीं की गई।
कोर्ट के आदेश की जानकारी करने के बाद शाम करीब पौने सात बजे नगर आयुक्त ने चुनाव परिणामों की घोषणा की।
चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक कार्यकारिणी समिति सदस्य के छह खाली पदों के लिए 8 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किए।
12 बजे नामांकन प्रक्रिया समाप्त हुई तो भाजपा और सपा पार्षदों ने अपनी-अपनी पार्टियों के एक-एक प्रत्याशी का नाम वापस लेकर निर्विरोध चुनाव कराने की बात शुरू की, लेकिन सहमति नहीं बन पाई।
कार्यकारिणी चुनाव समिति में शामिल अपर नगर आयुक्त डीके सिन्हा, अकाउंट ऑफिसर एके मिश्रा, उप नगर आयुक्त एसके तिवारी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा.आरके यादव की मौजूदगी में दोपहर 2 बजे से मतदान शुरू किया गया।
इसमें दो पार्षद राजेंद्र त्यागी और गुड्डी बेगम को छोड़कर 78 पार्षदों ने मतदान किया। इनके अलावा छह पदेन सदस्यों ने भी मतदान किया।
दो पार्षदों के बराबर वोटों ने कराया हंगामा
मतगणना में बसपा के नरेश कुमार और सपा की शशि यादव को बराबर नौ-नौ वोट मिले। महापौर की कुर्सी खाली होने की वजह से निर्णायक वोट नहीं डल सका। दोनों दलों के पार्षद प्रत्याशी की जीत का दावा करने लगे।
इसी बात परजमकर हंगामा हुआ। अधिकारियों ने पर्ची डालकर विजयी प्रत्याशी का नाम तय करने की बात कही तो भाजपा पार्षद अनिल स्वामी ने निगम एक्ट का हवाला देकर विरोध कर दिया।
अधिकारियों ने प्रथम और द्वितीय प्राथमिकता के आधार पर वोटों की गिनती दोबारा कराई। इसमें बसपा के नरेश कुमार को प्रथम प्राथमिकता वाले महज 7 वोट मिले, जबकि शशि यादव को 9 वोट मिले थे। शशि यादव को विजयी घोषित कर दिया गया।
क्रॉस वोटिंग ने बिगाड़ा गणित
नगर निगम में भाजपा, बसपा और सपा में हुई क्रास वोटिंग से बसपा के प्रत्याशी नरेश कुमार को हार का सामना करना पड़ा। बसपा ने नरेश कुमार को 11 पार्षदों का पैनल बनाकर दिया था।
मतगणना में उन्हें सिर्फ 7 वोट मिले। उनके पैनल के चार वोट दूसरे पैनल या पार्टी में डायवर्ट हुए। भाजपा की भी वोट डायवर्ट होने से एक प्रत्याशी देवी सिंह नागर को हार का सामना करना पड़ा।
सपा के भी कई वोट डायवर्ट हुए। हालांकि सपा प्रत्याशी ने दूसरे दल में भी सेंधमारी कर ली और अपने दोनों प्रत्याशी जिता लिए।
सांसद, विधायकों ने भी डाले वोट
पदेन सदस्यों की हैसियत से राज्यसभा सांसद नरेंद्र कश्यप, बसपा विधायक अमरपाल शर्मा, सुरेश बंसल, वहाब चौधरी और एमएलसी जितेंद्र यादव व प्रशांत चौधरी ने भी निगम में पहुंच मतदान किया। इसका फायदा बसपा और सपा को मिला।
भाजपा के सांसद वीके सिंह और सपा के कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी को भी मतदान करना था। वीके सिंह के विदेश में होने और राजेंद्र चौधरी के लखनऊ में होने की वजह से वे मतदान नहीं कर सके।
ये पार्षद बने कार्यकारिणी सदस्य
भाजपा की पिंकी डागर और हरीश चौधरी, बसपा के आदिल मलिक, सपा के शेखर त्यागी व शशि यादव और कांग्रेस के अजय शर्मा चुनाव में जीत हासिल कार्यकारिणी समिति के सदस्य बन गए।