पिछले एक महीने से सीमाओं पर डटे किसानों के संघर्ष में करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। सिंघु, टीकरी, गाजीपुर सहित दिल्ली के अलग अलग बॉर्डर पर मौजूद किसानों की संख्या लाखों में है जबकि उनके साथ 50 हजार से अधिक ट्रैक्टर ट्रॉली भी लाए गए हैं। अगर पंजाब, हरियाणा के अलग अलग हिस्सों से आए प्रत्येक ट्रैक्टर और वाहनों के आवागमन के लिए ईंधन के मद में औसत खर्च 10 हजार रुपये मान लिया जाए तो राशि 500 करोड़ से अधिक होगी।
किसानों के साथ लाए गए राशन और दूसरे जरूरी खर्च शामिल किए जाएं तो इसका भी आंकड़ा करोड़ों में है। किसान पिछले 34 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग पर डटे हुए हैं। भीषण सर्दी की वजह से भी ट्रैक्टर ट्रॉली को तैयार करने, गर्म कपड़ों सहित अन्य मदों में भी खर्च हो रहा है।
हालांकि किसान नेता अभिमन्यु कुहाड़ ने बताया कि किसानों ने अपने साथ चार-छह महीने का राशन ले लिया था। लेकिन आसपास के गांवों के अलावा किसानों के समर्थन में पहुंचने वाले लोग स्वेच्छा से खाने के लिए राशन, जरूरी कपड़े पर खर्च कर रहे हैं। किसानों का रहने पर काफी अधिक खर्च नहीं हो रहा है, क्योंकि अभी भी काफी मात्रा में राशन बचे हुए हैं।
गुरनाम सिंह का भी कहना है कि किसानों को रहने या खाने पीने पर अधिक खर्च नहीं हो रहा है, क्योंकि आंदोलन के समर्थन में सभी वर्ग के लोग हैं। दिल्ली की सभी सीमाओं पर आंदोलनरत किसानों के डटे होने पर अब तक करोड़ों होने वाले खर्च के बावजूद किसान आगे भी संघर्ष के लिए तैयार हैं। अगर, किसानों की मांगों पर सरकार के साथ होने वाली वार्ता के सकारात्मक परिणाम नहीं हुए तो आंदोलन पर होने वाले खर्च का आंकड़ा बढ़ता जाएगा। किसानों के साथ महंगी कारें, ट्रैक्टर ट्रॉली, पानी और घोड़ों के रसद के मद में भी काफी खर्च हो रहा है।