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Delhi Crime: ड्रग सप्लाई के लिए बदमाश कर रहा था युवाओं की भर्ती, नाबालिग के पकड़े जाने के बाद हुआ खुलासा

Sat, 17 Jan 2026 08:22 AM IST
विजय पुंडीर राजीव कुमार, अमर उजाला, दिल्ली

सार

बदमाश की पहचान जहांगीरपुरी निवासी 47 साल के आनंद राज उर्फ सागर के रूप में हुई है। उप निरीक्षक की लिखित शिकायत पर महेंद्र पार्क थाने में दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार बदमाश पर पहले से विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत 16 आपराधिक मामले दर्ज हैं। 
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Delhi police - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर पश्चिम जिला में ड्रग्स बेचने के लिए एक बदमाश युवाओं की भर्ती कर रहा है। एक नाबालिग के पकड़े जाने के बाद इसका खुलासा हुआ है। बदमाश ड्रग्स के मामले में गिरफ्तार हो चुका है। जेल से निकलने के बाद उसने फिर से तस्करी शुरू की। महेंद्र पार्क थाना पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस बदमाश की तलाश में जुट गई है। 

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बदमाश की पहचान जहांगीरपुरी निवासी 47 साल के आनंद राज उर्फ सागर के रूप में हुई है। उप निरीक्षक की लिखित शिकायत पर महेंद्र पार्क थाने में दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार बदमाश पर पहले से विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत 16 आपराधिक मामले दर्ज हैं। 

उसके खिलाफ 1996 में पहली बार जहांगीरपुरी थाने में गैर इरादतन हत्या का प्रयास का मामला दर्ज हुआ। उसके बाद वह लगातार विभिन्न अपराधों जैसे शारीरिक अपराध, आबकारी अधिनियम और मादक द्रव्य अधिनियम के तहत आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है। उसने आपराधिक गतिविधियों में अपने भाई पवन राज को भी शामिल किया और गैर-कानूनी गतिविधियों को अंजाम देने लगा। उसने आर्थिक लाभ के लिए अकेले या मिलकर प्रतिबंधित मादक पदार्थ को बेचना शुरू कर दिया।
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पुलिस के मुताबिक वह ड्रग्स बेचने के उद्देश्य से युवाओं को अपने गैंग में भर्ती करने लगा और इसके जरिये गैंग को व्यवस्थित रूप से संगठित किया। संगठित आपराधिक गतिविधियों में लगातार शामिल रहने की वजह से इलाके में सार्वजनिक सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। बार-बार गिरफ्तारी और न्यायिक कार्यवाही के बावजूद वह जमानत पर रिहा होने के बाद भी इसी तरह के अपराधों में शामिल हो जाता है। 2024 में आखिरी बार उसके खिलाफ छेड़छाड़ और पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। जिसमें पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी की थी। 

मादक द्रव्य अधिनियम के तहत पकड़े गए एक नाबालिग ने बाल न्यायालय में खुलासा किया था कि उसने आनंद राज से मादक पदार्थ खरीदता था और उसने आरोपी के घर की पहचान भी की। जिससे साफ पता चलता है कि आरोपी एक संगठित ड्रग-तस्करी सिंडिकेट चला रहा था।

पांच साल या आजीवन कारावास की सजा 
संगठित अपराध को लेकर दर्ज मामले में आरोपी को पांच साल से लेकर आजीवन कारावास और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। बीएनएस की धारा 111 के तहत कहा गया है कि संगठित रूप से अपराध कर वित्तीय या भौतिक लाभ पाने वाले आरोपी पर इस धारा के तहत मामला दर्ज हो सकता है।

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