इलाज के दौरान सेक्स पॉवर बढ़ने के बजाय घटने से नाराज युवक को डॉक्टर के मर्डर के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
इस केस में अभियोजन पक्ष ने दो अहम गवाहों को मुकरे हुए विटनेस घोषित किया था, लेकिन परिस्थितियों के अनुसार मिले सबूतों पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
लगभग आठ साल तक चली इस मामले की सुनवाई में एक के बाद एक कई अहम और रोचक मोड़ आए हैं। आगे की स्लाइड में पढ़िए पूरा मामला:
पैसे नहीं लौटा रहा था डॉक्टर
दरअसल यह घटना 28 मई 2006 को आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास हुई थी। राजौरी गार्डेन में रहने वाले राजेश एबॉट पहाड़गंज में जैदी दवाखाना चलाते थे।
अदालत में पेश मामले के अनुसार मुताबिक, जावेद अली (19) एबॉट के पास अपनी सेक्स पावर बढ़ाने का इलाज करा रहा था। काफी बड़ी मात्रा में पैसा लुटाने के बाद जब जावेद को ऐसा महसूस हुआ कि उसकी सेक्स पावर बढ़ने के बजाय कम हो गई है तो वह डॉक्टर पर भड़क गया।
उसने एबॉट से पूरा पैसा वापस करने के लिए कहा लेकिन डॉक्टर इस बात पर राजी नहीं हुआ। पैसे वापस न मिलने से गुस्साए जावेद ने डॉक्टर के मर्डर का प्लान बना डाला।
मर्डर से पहले गजब की प्लानिंग
मर्डर करने वह पूरी प्लानिंग के साथ गया। उसने दो पिस्तौल व कारतूस बैग में रखे और आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास पहुंच गया।
उसे मालूम था कि एबॉट अपनी कार वहां पार्क करने के बाद रिक्शे में बैठकर अपने दवाखाना जाते थे। डॉक्टर के आने पर जावेद ने दोनों पिस्तौल निकालीं और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू दी। इतनी सारी गोलियां एक साथ शरीर में लगने से डॉक्टर की मौके पर ही मौत हो गई।
डॉक्टर की हत्या के बाद जावेद मौके से भाग निकला लेकिन बाद में उसे एक दुकान से गिरफ्तार कर लिया गया था। उसके बैग से दोनों पिस्टल और कारतूस भी बरामद हुए थे।
पत्नी ने भी दी गवाही
पुलिस जांच के बाद जब यह मामला पटियाला हाउस कोर्ट में पहुंचा तो लगभग आठ साल तक चली लंबी सुनवाई के बाद एडिशनल सेशन जज राज कपूर ने जावेद को राजेश एबॉट की हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
इस मामले में पुलिस ने राजेश की पत्नी का भी बयान लिया था। गौरी ने सबत के तौर पर एक रजिस्टर दिखाया था जिस पर उसके मृतक पति राजेश ने खुद ही जावेद का नाम लिखा हुआ था।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष के अधिवक्ता का तर्क था कि रजिस्टर में जावेद का पता नहीं लिखा होने की वजह से यह साबित नहीं होता कि यह एंट्री उनके मुवक्किल के बारे में लिखी गई है। उन्होंने रजिस्टर के असली होने पर भी सवाल उठाए थे।
जमानत मिलते ही की थी शादी
इस पूरे मामले में सबसे अहम गवाह एक रिक्शा चालक बना। मंदिर मार्ग पुलिस ने उसका बयान दर्ज किया था। बयान में रिक्शा चालक ने बताया था कि उसने खुद जावेद को गोली चलाते हुए देखा था और उसने ही पीछा करके जावेद को दुकान पर पकड़ा था।
हालांकि बाद में कोर्ट के भीतर वह अपनी बात से मुकर गया। इसके अलावा जावेद को पकड़ने वाले दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल को भी अभियोजन पक्ष ने गवाह के तौर पर पेश किया था, लेकिन वह भी अदालत में अपने बयान से पलट गया।
हालांकि कोर्ट ने पुलिस की थ्योरी को सही माना कि जावेद ने इलाज से संतुष्ट नहीं होने पर राजेश एबॉट की हत्या की थी। जमानत पर छूटने के बाद जावेद ने शादी कर ली थी। अब उसे जेल भेज दिया गया है।