जेवर क्षेत्र में अवैध रेत खनन कर माफिया यमुना नदी का सीना चीर रहे हैं। बालू से एक ही दिन में लाखों की कमाई का मोटा खेल चल रहा है। ऐसा नहीं कि प्रशासन के अफसरों को माफिया के खेल की भनक नहीं।
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सब कुछ पता होने के बावजूद अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि खनन हरियाणा की सीमा में किया जा रहा है। अवैध खनन से यमुना में गहरे गड्ढे बन गए जिसमें डूबकर लोगों की जान चली जाती है। बुधवार को गंगा दशहरा पर अलीगढ़ के टप्पल से आए एक किशोर की यमुना में बने कुंडनुमा गड्ढे में डूबने से मौत हो गई। इससे भी अधिकारी सबक नहीं ले रहे।
रोक के बावजूद यमुना नदी में धड़ल्ले से खनन किया जा रहा है। माफिया कई बार यमुना किनारे खेतों में भी खनन करने लगते हैं। फसल बर्बाद होने पर किसान विरोध करते हैं तो उन्हें डराकर धमका कर भगा दिया जाता है।
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आलम यह होता है कि कोई भी किसान अकेले माफिया का विरोध करने उनके पास तक नहीं जा पाता। माफिया के गुर्गें हथियारों से लैस रहते हैं। पोकलेन और जेसीबी रात-दिन खनन कर यमुना नदी का सीना चीर रही हैं।
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खनन होने से यमुना में कुंडनुमा गड्ढे हो गए हैं
यमुना नदी
जेवर तहसील और हरियाणा की सीमा पर यमुना नदी के किनारे बसे गांव पूरन नगर, झुप्पा और कानीगढ़ी में खनन धड़ल्ले से किया जा रहा है। हर रोज सैकड़ों डंपर, ट्रैक्टर ट्राली और ट्रकों में बालू भरकर सप्लाई हरियाणा, दिल्ली, ग्रेटर नोएडा आदि स्थानों पर की जाती है।
खनन होने से यमुना में कुंडनुमा गड्ढे हो गए। गंगा दशहरा या अन्य पर्व पर जब श्रद्धालु स्नान करने आते हैं तो गड्ढे होने से उनके साथ अक्सर हादसा हो जाता है। स्थानीय लोग पुलिस और प्रशासन के अफसरों से मिलकर माफिया की शिकायत करते हैं लेकिन कार्रवाई नहीं होती।
इतना ही नहीं, माफिया यूपी- हरियाणा सीमा का फायदा उठाते हैं। स्थानीय लोगों के विरोध में जब पुलिस रेत खनन बंद कराने जाती है तो माफिया यूपी के अधिकारियों को हरियाणा की सीमा में खनन का पट्टा होने की बात कहते हैं।
हरियाणा के अधिकारियों को यूपी की सीमा में खनन का पट्टा बताकर धड़ल्ले से खनन कर रहे हैं। लेकिन राजस्व विभाग से पट्टे की पैमाइश नहीं कराई जाती। पैमाइश से सब बातें स्पष्ट हो जाएगी। ऐसा अधिकारी क्यों नहीं कर रहे यह सवालों के घेरे में हैं।
सुबह 5:30 बजे- रात में खनन करने वाली टीम वापस घरों को जा रही थी। दिन में काम करने वाले लोग पहुंचे। आधे घंटे तक रातभर के खनन का हिसाब लगता रहा। इसके बाद पूरा चार्ज दिन वाली टीम को सौंपा जाता है।
समय : 6 बजे- जेवर पलवल मार्ग के नीचे पहले से खड़े करीब 20 डंपरों को रेत का स्टॉक की तरफ भेजा जाता है। दो जेसीबी पुल के नीचे से निकलती है। रात में खराब रास्ते की मरम्मत शुरू हो जाती है।
समय : 6:40 बजे- रास्तों को ठीक करने के बाद डंपरों से रेत के बदले पैसों की पर्ची काटकर उनमें रेत भरने के लिए भेजा जाता है। लगभग एक घंटे में 10 से 15 डंपर को भरकर निकाल दिया जाता है।
समय : 8 बजे- कुछ ट्रैक्टर रेत लेने यमुना पुल के नीचे पहुंचते हैं। वहां मौजूद खनन माफिया को पैसा देकर पर्ची लेने के बाद पोकलेन से रेता भरने के साथ ही वापस निकल जाते हैं।
समय : 9: 20- यमुना से निकाले गए रेत का स्टॉक कम हो जाता है। दो पोकलेन को यमुना के बहते पानी से रेत निकालने के काम पर लगा दिया जाता है। बाकी दोनों जेसीबी डंपरों और ट्रैक्टरों को भरने के काम पर लगी रहती हैं।
मशीनों से एकत्रित किया जाता है रेत
यमुना नदी में पानी होने के कारण मशीनों से रेत को एक स्थान पर एकत्रित कर लिया जाता है। इसके बाद रेत को वाहनों में भरकर भेज दिया जाता है। सैकड़ों वाहन रात दिन रेत लेकर जाते हैं।
यमुना पुल के नीचे हरियाणा की तरफ बालू खनन चल रहा है। एक बार उन लोगों से पूछताछ की गई थी। उन लोगों ने हरियाणा सरकार द्वारा पट्टे के कागजात दिखाए थे। रेत को जेवर के रास्तों से अन्य शहरों में बिक्री के लिए भेजा जा रहा है। रेत लेकर चलने वाले सभी वाहनों पर रवन्ना होता है, जिसके बाद हम किसी तरह की उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकते। सभी रास्ते आम हैं इन्हें रोका भी नहीं जा सकता।
सुरेश कुमार मिश्र,एसडीएम जेवर