सीबीआई ने तीस हजारी अदालत की सीनियर सिविल जज रचना तिवारी लखनपाल को बुधवार रात गुलाबी बाग स्थित सरकारी आवास पर चार लाख रुपये घूस लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
विज्ञापन
इसी मामले में जज के पति वकील आलोक लखनपाल और एक अन्य वकील विशाल मेहन को बृहस्पतिवार सुबह गिरफ्तार किया गया। बृहस्पतिवार को विशेष सीबीआई अदालत ने आरोपी जज को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
वहीं, जज के पति और दूसरे अधिवक्ता से पूछताछ के लिए अदालत ने सीबीआई को दो दिन का रिमांड दिया है। सीबीआई ने आरोपी जज के आवास से 94 लाख रुपये भी बरामद किए हैं।
विज्ञापन
20 लाख की मांगी थी घूस
सीनियर सिविल जज रचना तिवारी लखनपाल
सीबीआई का आरोप है कि महिला जज ने विशाल मेहन को एलसी नियुक्त करने के लिए 20 लाख रुपये घूस मांगी थी। इस संबंध में सीबीआई को 27 सितंबर को शिकायत मिली थी। इसके बाद बुधवार रात घूस की पहली किस्त लेते हुए जज को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।
बृहस्पतिवार को अदालत में पेश करने पर तीस हजारी स्थित विशेष सीबीआई जज संजीव अग्रवाल ने आरोपी महिला जज रचना को 13 अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उनकी ओर से कई वकील पेश हुए और जमानत अर्जी दायर की।
जमानत अर्जी पर 3 अक्तूबर को सुनवाई होगी। वहीं, अदालत ने महिला जज के पति आलोक और आरोपी विशाल से पूछताछ के लिए सीबीआई को दो दिन का रिमांड दिया है। सीबीआई इन आरोपियों को 1 अक्तूबर को कोर्ट में पेश करेगी। इस बीच इनके वकील सीबीआई कार्यालय में इनसे एक घंटे मुलाकात कर सकते हैं।
जज के समर्थन में आए सैकड़ों वकील
भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार जज रचना तिवारी लखनपाल, उनके पति आलोक लखनपाल और एलसी विशाल मेहन के समर्थन में सैकड़ों वकील कोर्ट पहुंचे। आरोपियों की सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
सीबीआई ने आरोपियों को पहले सीबीआई जज संजय गर्ग के समक्ष पेश किया। उन्होंने मामले की सुनवाई को सीबीआई जज संजीव अग्रवाल की कोर्ट में भेज दिया।
गिरफ्तार सीनियर सिविल जज तीस हजारी अदालत के कमरा नंबर-350 में बैठती हैं और वे सहायक रेंट कंट्रोलर (एआरसी) हैं। उनके समक्ष संपत्ति विवाद और किराया विवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई होती थी।
ऐसे मामलों में कोर्ट पक्षकारों की मांग पर एलसी नियुक्त करता है। जिस वकील को एलसी नियुक्त किया जाता है, वह विवादित संपत्ति का दौरा कर अपनी रिपोर्ट कोर्ट को देता है। इस काम के लिए एलसी को अच्छी फीस दी जाती है, जिसका भुगतान संबंधित पक्ष द्वारा किया जाता है।