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ऐसे में कैसे बनेगा देश का भविष्य, स्कूल के दो कमरो में भरे रहते हैं 450 बच्चे

Thu, 12 May 2016 01:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव

सार

  • रेगुलर अध्यापक केवल एक
  • मिडिल स्कूल में 5 साल से कोई अध्यापक नहीं
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जमालगढ़ स्कूल में जमीन पर बैठी बच्चियां - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भले ही सरकार महिला शिक्षा पर जोर देने का जमकर बखान कर रही हो लेकिन पुन्हाना खंड के गांव जमालगढ़ के मिडिल गर्ल स्कूल को देखकर नहीं लगता कि सरकार इस ओर कोई दिलचश्पी ले रही है। पहली से पांचवी कक्षा तक कुल 180 और छटी से आठवीं कक्षा तक 268 छात्राओं सहित कुल 450 बच्चे हैं।
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प्राइमरी के 180 बच्चों को पढाने के लिये एक रेगुलर और तीन गेस्ट अध्यापक हैं जबकी छटी से आठवीं कक्षा तक कुल 268 लडकियों को पढाने के लिये पिछले पांच साल से कोई अध्यापक ही नहीं हैं। सरकार और शिक्षा विभाग द्वारा मिडिल स्कूल की बेटियों के लिये कोई अध्यापक नियुक्त ने किये जाने के बावजूद मां-बाप अपनी बेटियों को स्कूल इस वजह से भेज रहे हैं कि वो स्कूल जाऐगी तो कुछ सीखकर ही आऐगी।

मिडिल स्कूल में अध्यापक नियुक्त ने होने पर प्राईमरी के अध्यापक ही अपनी कलासों के साथ-साथ मिडिल स्कूल के बच्चों को भी पढा देते हैं। प्राईमरी स्कूल के अध्यापक हरीश चंद ने बताया कि वर्ष 2011 में उनका गर्ल मिडिल स्कूल अपग्रेड हुआ था। पिछले 5 साल से शिक्षा विभाग ने इस स्कूल में एक भी अध्यापक नहीं भेजा है। उन्होने बताया कि उसके स्कूल में एक रेगुलर और तीन गेस्ट अध्यापक हैं।
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स्कूल के हेडमास्टर सस्पेंड चल रहे हैं। प्राईमरी में 180 और मिडिल में 268 छात्राओं सहित कुल 450 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उन्होने कहा कि बच्चों को पढाना तो किया इतने बच्चों को तो केवल घेर कर ही रखना पडता हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास चार कमरे हैं। जिनमें से एक कमरे में मिड-डे-मील भरा रहता है। जबकी दो कमरो की फर्स कच्ची और वे बरसात में टपकते रहते हैं।

उन्होने कहा कि साडे चार सौं बच्चो को तीन कमरों में भेड बकरियों की तरह घेर कर रखना पडता है। बरसात और ज्यादा गर्मी के मौसम में बच्चों की छुटटी करनी पडती है। गांव जमालगढ निवासी बलोक समिति सदस्य सलमान, पंच फारूख, पंच इरफान और पंच जुनेद ने बताया कि सरकार ही नहीं चहाती कि मेवात कि बेटियां पढे।   स्कूल में अध्यापक नियुक्त करने के लिये वह दर्जन भी अधिकारियों से मिले लेकिन कोई अमन नहीं हुआ। उन्होने कहा कि सरकार जब बेटी पढाओ बटी बचाव का नारा देती है तो बटियों को पढाने के लिये अध्यापक क्यों नहीं देती है। उन्होने कहा कि उनकी बेटियों को पढाने के लिये कम से कम दस महिला अध्यापक होनी चाहियें।
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