लश्कर-ए-तैयबा के मेवात माड्यूल से जुड़े संदिग्ध की तलाश में सोमवार को मेवात क्षेत्र में गई दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सैकड़ों लोगों ने घेर लिया। लोगों के भारी विरोध के सामने पुलिस को हिरासत में लिए दोनों संदिग्धों को छोड़ना पड़ा।
इस दौरान करीब पांच घंटे तक हाथों में लाठी-डंडा, तलवार और धारदार हथियार लेकर सैकड़ों लोग सड़क पर धरना प्रदर्शन करते रहे।
जानकारी के अनुसार सोमवार की सुबह दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने फिरोजपुर झिरका के गांव मांडीखेड़ा में छापा मारकर संदिग्धों को उठा लिया। पुलिस का आरोप है कि फरार चल रहे मेवात मॉडयूल के महत्वपूर्ण सदस्य अब्दुल सुबान से ये दोनों लोग निरंतर संपर्क में हैं।
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स्पेशल सेल दोनों को पूछताछ के लिए फिरोजपुर झिरका थाना ले गई थी। इस बीच मांडीखेड़ा और आसपास के गांवों के सैकड़ों लोग एकत्रित हो गए और गुड़गांव-अलवर मार्ग पर हाथों में लाठी-डंडा और धारदार हथियार लेकर सैकड़ों ने सड़क पर प्रदर्शन कर चक्का जाम कर दिया।
प्रदर्शनकारी दोनों गिरफ्तार युवकों को छोड़ने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि साजिश के तहत मेवात के युवकों को आतंकवाद के नाम पर फंसाया जा रहा है।
इस घटना की सूचना मिलते ही डीएसपी फिरोजपुर झिरका दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को समझा बुझाने की कोशिश की लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर डटे रहे। इसके बाद दिल्ली पुलिस को मजबूरन दोनों संदिग्धों को छोड़ना पड़ा। दिल्ली पुलिस ने फिरोजपुर झिरका थाने में देर शाम तक डेरा जमाए हुई थी।
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इस दौरान इस्लामिक मदरसे के मुफ्ती रफीक अहमद, मौलाना साबिर हुसैन कासमी, जुबैर खान अलवरी, मांडीखेड़ा के पूर्व सरपंच दिनेश कालड़ा, समाज सेवी संजय सेठी, पूर्व डिप्टी चेयरमैन उस्मान दुर्रानी आदि ने बताया कि वह जाम नहीं लगाना चाहते थे। लेकिन पुलिस की कार्यशैली के चलते उन्हें इसके लिए मजबूर होना पड़ा।
उन्होंने कहा कि मेवात का आतंकवाद व आतंकवादियों से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं है। उन्हें मुजफ्फरनगर, गोपालगढृ और दिल्ली के नाम पर बदनाम किया जा रहा है। इसके लिए कांग्रेस सरकार दोषी है। इस बीच हिरासत से छूटे मुबारिक ने बताया कि पुलिस उससे राशिद व शाहिद के बारे में पूछ रही थी।