अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन और मोहन कुमार के हस्ताक्षर में कोई समानता नहीं है। यह बयान हैंड राइटिंग एक्सपर्ट ने बचाव पक्ष से जिरह करते हुए दिया। मामले में शुक्रवार को बचाव पक्ष ने अपनी बहस पूरी कर दी।
अदालत ने 17 अक्तूबर से अंतिम जिरह शुरू करने का निर्देश दिया है।पटियाला हाउस स्थित विशेष सीबीआई जज विनोद कुमार के समक्ष हैंड राइटिंग एक्सपर्ट वीसी मिश्रा से बचाव पक्ष ने जिरह की।
मिश्रा ने अपने बयान में कहा कि मोहन कुमार के पासपोर्ट व उसके आवेदन पत्र के हस्ताक्षर का काफी हद तक नमूने के तौर पर दिए गए हस्ताक्षर से मिलान नहीं होता।
सीबीआई का आरोप है कि छोटा राजन ने मोहन कुमार नाम से फर्जी पासपोर्ट लिया था। इस पासपोर्ट व आवेदन फार्म के दस्तखत का मिलान सीबीआई ने छोटा राजन के दस्तखत से करवाया था। छोटा राजन के नमूने के दस्तखत तिहाड़ जेल में लिए गए थे।
17 से शुरू होगी अंतिम जिरह
कोर्ट
अदालत ने छोटा राजन की अर्जी पर तिहाड़ जेल प्रशासन को सोमवार को रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। राजन ने अर्जी दायर कर कहा कि वह बीमार है और उसकी नाक से कई बार खून आ जाता है। उसकी 2011 में हार्ट सर्जरी हो चुकी है।
इसके मद्देनजर उसका इलाज जेल के बजाय एम्स या किसी अन्य अस्पताल में करवाया जाए। पेश मामले में सीबीआई कोर्ट में अपना बयान दर्ज करवाते हुए छोटा राजन ने कहा था कि खुद भारतीय खुफिया एजेंसियों ने मोहन कुमार के नाम पर फर्जी पासपोर्ट मुहैया करवाया था।
क्योंकि दाऊद इब्राहिम के लोग उसे वर्ष 2000 में बैंकॉक में जान से मारने की कोशिश कर रहे थे। इसका कारण यह था कि उसने 1993 के बम धमाकों के आरोपियों व आतंक के खिलाफ लड़ाई में साथ दिया था।
तिहाड़ जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अपने बयान में छोटा राजन ने कहा कि जब दाऊद इब्राहिम को पता चला कि मैं भारतीय एजेंसियों को मुंबई बम धमाकों की सूचना दे रहा हूं, तो उन लोगों ने दुबई में मेरा पासपोर्ट छीन लिया।
इन लोगों ने मुझे मारने की कोशिश की, लेकिन मैं किसी तरह दुबई से बचकर मलयेशिया पहुंच गया। वहां से बैंकॉक निकल गया। वहां पर वर्ष 2000 में दाऊद के गुर्गों ने जानलेवा हमला किया। इसके बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने खुद मोहन कुमार के नाम पर फर्जी पासपोर्ट मुहैया करवाया।