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सूदखोरों से परेशान फालोअर ने दी जान

Tue, 29 Sep 2015 01:55 PM IST
अमर उजाला, मुरादनगर
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न्यू डिफेंस कालोनी में सोमवार सुबह सूदखोरों के उत्पीड़न से परेशान आकर हिमांशु शर्मा ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। हिमांशु मेरठ पुलिस लाइन में फालोअर तैनात था।
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उसकी डायरी से पुलिस को सुसाइड नोट मिला है। इसमें उसने कालोनी के ही चार लोगों पर ढाई माह में साढे़ सात लाख रुपये कर्ज के 18 लाख रुपये करने और मकान पर जबरन कब्जा करने की कोशिश का आरोप लगाया है।

मृतक की मां की तहरीर पर पुलिस ने दो महिलाओं समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

न्यू डिफेंस कालोनी टावर रोड स्थित गली नंबर-5 में हिमांशु शर्मा उर्फ रिंकू (28) पत्नी निशिता, बेटी रिया (2) और मां सरोज बाला के साथ रहता था। उसकी दो बहनें अनुपम व अनुराग की शादी हो चुकी है।
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यूपी पुलिस में दीवान रहे उसके पिता विनोद की वर्ष 2006 में कैंसर से मौत हो चुकी है। मृतक आश्रित कोटे के तहत 2012 में हिमांशु को मेरठ पुलिस लाइन में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी फालोअर की नौकरी मिली थी।

सोमवार सुबह परिवार के सभी लोग नीचे कमरे में थे। इसी बीच हिमांशु दूसरी मंजिल पर बने कमरे में गया और रस्सी का फंदा बनाकर सुसाइड कर लिया।

करीब दस बजे पत्नी निशिता मोबाइल पर बात करती कमरे में पहुंची तो पति को फंदे पर लटका देख चीख पड़ी। पड़ोसियों की मदद से हिमांशु को नीचे उतारा गया और अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौके पर फिंगर प्रिंट टीम ने जांच पड़ताल की।

एसओ उम्मेद सिंह ने बताया कि मृतक की डायरी से सुसाइड नोट मिला है। इसमें मौत का कारण चार सूदखोरों को बताया गया है।

मृतक की मां सरोज बाला ने कालोनी निवासी गीता उसके पति कुलदीप, नीतू उसके पति अंकित के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।

सूदखोर मांगे रहे थे 18 लाख रुपये
हिमांशु की मां सरोज बाला ने बताया कि ढाई माह पहले 7.50 लाख रुपये ब्याज पर लिए थे। सूदखोर जबरन मकान पर कब्जा करना चाहते थे।

जबकि एग्रीमेंट का समय 12 महीने तय हुआ था। बाद में तय हुआ था कि नौ लाख रुपये में मामला खत्म कर दिया जाएगा।

इसके चलते हिमांशु ने सोमवार को नौ लाख का इंतजाम भी कर लिया था। मगर सोमवार सुबह करीब आठ बजे पहुंचे सूदखोरों ने 18 लाख की डिमांड की। इसके चलते हिमांशु परेशान हो उठा था।

कहीं आत्मग्लानि तो नहीं बनी मौत का सबब
सुसाइड नोट में लिखा है कि सूदखोरों के चक्कर में उसने अपनी मां के साथ भी धोखा किया। इसके आधार पर पुलिस का कहना है कि 128 गज में बना मकान हिमांशु की मां के नाम है।

हिमांशु ने ब्याज पर रुपये लेते हुए 60 गज जमीन जमानत के तौर पर सूदखोरों के पास रखी थी और 12 माह में रुपये लौटने का एग्रीमेंट हुआ था। इससे मृतक की मां अनजान थी।

इसका फायदा उठाते हुए सूदखोरों ने सरोज बाला से जमीन के बैनामे पर हस्ताक्षर करा लिए थे। बैनामा होने से हिमांशु भी अनजान था।

बाद में सूदखोरों के जमीन पर कब्जा करने की कोशिश के चलते हिमांशु के सामने धोखाधड़ी का राज खुला और उसने बैनामा वापस करने की मांग की।

बैनामा वापस करने की एवज में सूदखोर 18 लाख की डिमांड कर रहे थे। जबकि हिमांशु नौ लाख रुपये देने को तैयार था। मगर सूदखोर 18 लाख पर अड़े थे। सुसाइड नोट को देखें तो हिमांशु को मां के साथ की गई धोखाधड़ी की आत्मग्लानि थी।
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