वेतन के पैसे मांगने गए फील्ड ऑफिसर को अस्पताल के सुरक्षा इंचार्ज व बाउंसरों ने पीट दिया। बृहस्पतिवार को इसके विरोध में अस्पताल के बाहर पीड़ित के समर्थक कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया और अस्पताल प्रंबधन के खिलाफ नारेबाजी की।
सामाजिक न्याय एवं अधिकार समिति के चेयरमैन दीनदयाल गौतम का कहना है कि पीड़ित राजेश कुमार बाटा मोड़ स्थित एक निजी अस्पताल में अप्रैल-2015 से फील्ड ऑफीसर की नौकरी पर था।
उसे 15000 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था। 14 मार्च को उसने नौकरी छोड़ दी और डेढ़ महीने का वेतन अस्पताल पर बकाया रह गया। बृहस्पतिवार को उसके मोबाइल फोन पर ठेकेदार नरेंद्र से वेतन के बारे में बात हुई तो उसने बकाया वेतन के लिए अस्पताल बुलाया।
शाम करीब 7 बजे वह अकेला अस्पताल में गया। आरोप है कि वहां सुरक्षा इंचार्ज रामकिशन मलिक उसे मिला अंदर आने से मना कर दिया। विरोध करने पर बाउंसरों ने उसके साथ मारपीट की।
गौतम का कहना है कि राजेश से की गई मारपीट के कारण उसकी छाती, पैर, कमर, गर्दन और मुंह पर चोटें आई है। इसके विरोध में अस्पताल के कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। उनका कहना था कि यदि उनके बकाये का भुगतान नहीं किया गया तो वह सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।