रंगदारी के मामले में पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट ही उसके गले की मुसीबत बन गई। शिकायतकर्ता ने पुलिस को अपनी शिकायत दी थी लेकिन पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया।
पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में पहली नजर में रंगदारी का मामला बनने की बात भी मानी। पुलिस के रवैये पर नाराजगी जाहिर करते हुये जांच अधिकारी को नोटिस जारी कर पूछा कि जब मामला बनता था तो केस दर्ज क्यों नहीं किया।
कोर्ट के कोप भाजन से बचने के लिये पुलिस ने उसके निर्देश से पहले ही आरोपी पत्रकार के खिलाफ दो नवंबर को एफआईआर दर्ज कर दी।
पेश मामला उत्तरपूर्वी जिले के सीलमपुर थाना इलाके का है। शिकायतकर्ता मोहम्मद रिजवान ने एक पत्रकार मोहम्मद राहत द्वारा रंगदारी के खिलाफ सीलमपुर थाने में शिकायत दी थी। लेकिन पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया। इसके बाद रिजवान ने अदालत की शरण ली।
एसीएमएम शरद गुप्ता के समक्ष अधिवक्ता आरके चौधरी ने कहा कि मो. राहत पुलिसकर्मियों व मो. रिजवान का वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल कर रहा था। उसने इसकी पुलिस व कोर्ट में भी शिकायत दे रखी थी। इसके सहारे वह पुलिसकर्मियों व रिजवान को ब्लैकमेल कर पांच लाख मांग रहा था।
अदालत ने जांच अधिकारी को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में पहली नजर में रंगदारी का मामला बनने की बात स्वीकार की।
पुलिस की रिपोर्ट पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए अदालत ने कड़े शब्दों में पूछा कि अगर रंगदारी का मामला बनता था तो शिकायतकर्ता की एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई। अदालत ने जांच अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर 11 नवंबर तक जवाब मांगा है।