पुलिस हिरासत में मारे गये सोमपाल की लाश को सरकारी जिप्सी से ठिकाने लगाया गया था। बताया जा रहा है कि जिप्सी थाना प्रभारी की थी। जांच के दौरान फोरेंसिक टीम ने जिप्सी की जांच-पड़ताल की है और कुछ सबूत इकट्ठा किए हैं। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से खून के सबूत भी लिए हैं।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांच में यह बात सामने आयी है कि 28 दिसंबर को सोमपाल को आदर्श नगर थाने में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। इस बात के सबूत थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हैं। उसे थाने में लाने के बाद ड्यूटी आफिसर के पास बिठाया गया था।
बताया जा रहा है कि सोमपाल रात में वहां से उठकर उपर की ओर भागा। पुलिसकर्मियों ने उसका पीछा किया। लेकिन छत पर पहुंचकर सोमपाल ने वहां से छलांग लगा दी। पुलिसकर्मियों ने सरकारी जिप्सी पर जख्मी सोमपाल को लेकर बाबू जगजीवन राम अस्पताल पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया गया। इस बात की जानकारी होने के बाद थाना प्रभारी ने पुलिसकर्मियों को थाने से बाहर रहने के लिए कहा और बाद में सोमपाल के शव को ठिकाने लगाने के लिए कहा। पुलिसकर्मियों ने निर्देश मिलने के बाद शव को सुनसान जगह पर फेंक दिया।
घटना के बाद थाना प्रभारी दो दिन की छुट्टी पर चले गये। जबकि पुलिसकर्मी अपने काम पर लौट आए। जांच में यह बात भी सामने आयी है कि पुलिसकर्मियों ने शव को फेंकने के बाद जिप्सी को धुलवा दिया था। जब मामले का खुलासा हुआ तो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने थाना प्रभारी से इस बाबत पूछताछ की। लेकिन उन्होंने घटना के बारे में अनभिज्ञता जतायी और सिपाहियों पर इसका ठीकरा फोड़ दिया। लेकिन सिपाहियों ने सारी बातों का खुलासा कर दिया।