भोपुरा की झुग्गियों में रहने वाले एक शख्स ने टीवी देखते समय रोते बच्चे की घूंसा मारकर जान ले ली। टीवी देखने के दौरान छह माह का बच्चा रोने लगा तो पिता चुप कराने लगा।
बच्चे की चीख नहीं थमी। ऐसे में टीवी देखने में मशगूल पिता ने गुस्से में मासूम के पेट पर घूंसा मार दिया। घूंसा लगते ही बच्चे की आवाज बंद हो गईं। अब पिता को अपनी गलती का अहसास हुआ।
वह बेटे को लेकर अस्पताल भागा लेकिन बच्चे की मौत हो गई। मामला पुलिस तक पहुंचा लेकिन बच्चे की मां ने पति के पक्ष में बयान दिया। कहा, बच्चा बुखार से पीड़ित था। इसी से उसकी मौत हो गई।
आरोपी पिता भोपुरा की झुग्गियों में रहता है। वह पत्नी के साथ कबाड़ बीनने का काम करता है। आरोपी पिता के मुताबिक, बुधवार सुबह पत्नी काम पर चली गई। वह में अपने छह माह के बेटे को संभाल रहा था।
दोपहर करीब दो बजे पत्नी घर लौटी और पानी भरने को पास के सरकारी हैंडपंप पर चली गई। इस दौरान पिता घर पर टीवी देख रहा था। अचानक मासूम रोने लगा। पिता ने कई बार उसे चुप कराने का प्रयास किया।
पिता का ध्यान बच्चे से ज्यादा टीवी में लगा था। जब मासूम चुप नहीं हुआ तो पिता ने उसके पेट में घूंसा मार दिया। घूंसा लगते ही छह माह का बच्चा अचेत हो गया। बच्चे की आवाज बंद होते ही पिता गलती का अहसास हुआ।
वह पड़ोस में रहने वाले एक युवक के साथ बच्चे को लेकर दिल्ली के जीटीबी अस्पताल पहुंचा जहां इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई। किसी ने बच्चे की मौत की सूचना पुलिस को दे दी।
पुलिस ने पहुंच आरोपी पिता को हिरासत में ले लिया। हालांकि पत्नी ने पुलिस को बताया कि बेटा दो दिन से बुखार से पीड़ित था। इसी वजह से उसकी मौत हुई है।
एसएचओ उपेंद्र यादव ने बताया कि लोगों से पता चला है कि बच्चा बीमार था। पत्नी के लिखित बयान के बाद पति को छोड़ दिया गया है।
पहले भी गुस्सा करता था आरोपी पिता
आसपास के लोगों ने बताया कि पिता अक्सर बच्चे के रोने पर चिल्लाता था और गुस्सा करता था। वह पत्नी पर भी गुस्सा कर उसके साथ मारपीट करता है।
पत्नी के लिखित में देने पर पुलिस ने भले ही आरोपी को छोड़ दिया हो मगर चौकी इंचार्ज युवराज सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में लग रहा है कि आरोपी पिता नशा करता है। इतना ही नहीं वह घटनाक्रम को ठीक से बता भी नहीं पा रहा। ऐसे में किसी मानसिक रोग से ग्रस्त भी हो सकता है।
बोला पिता, खो दिया अपने जिगर का टुकड़ा
मूलरूप से पश्चिम बंगाल के रहने वाले पिता ने रोते हुए बताया कि उससे बड़ी गलती हो गई। उसने अपने जिगर के टुकड़े को खो दिया। उसने कहा कि उसने बच्चे को गुस्से में मार दिया। मगर वह उसे मारना नहीं चाहता था।
आर्थिक तंगी दे रही मानसिक रोग
मनोचिकित्सक डा. रश्मि जोशी ने बताया कि आर्थिक तंगी से परेशान रहने वाले लोग अक्सर मानसिक रोगों से ग्रसित हो जाते हैं। ऐसे में वह अपने परिजनों पर गुस्सा करने लगते हैं।
मगर गरीबी के चलते इसका इलाज भी नहीं करा पाते। परेशानी उन्हें इतने गुस्से में ले जाता है कि वह अपनों पर भी हाथ उठाने से नहीं चूकते। अक्सर वे सुसाइड जैसे कदम भी उठा लेते हैं।