अगर आपका नोएडा में मकान है और उसे आपने किराए पर दे रखा है तो जरा सावधान हो जाएं। चूंकि बिजली विभाग के रीडरों से मिलकर कुछ किराएदारों ने जमकर बिजली फूंकी और बिल मकान मालिकों को भरना पड़ रहा है।
पिछले करीब पांच माह में इस तरह की 10 शिकायतें विभागीय अफसरों के सामने आई हैं। शहर के कुछ किराएदार बिजली विभाग के संविदा पर तैनात मीटर रीडरों के साथ मिलकर मकान मालिकों के साथ गड़बड़ कर रहे हैं।
जब तक किराएदार मकान में रहते हैं तब तक तो खूब बिजली प्रयोग करने के बाद भी मात्र चार-पांच सौ रुपये ही बिल आता है। यह लोग बिजली कर्मचारियों से मिलकर मीटर को बंद करा देते हैं या फिर कम यूनिट का बिल निकलवा लेते हैं। जिससे बिल तो कम आता है मगर मीटर में यूनिट बढ़ती रहती है। 11 माह या 22 माह के बाद जब किराएदार मकान खाली करके जाता है तो उसके बाद सारी यूनिटों का बिल एक साथ आ जाता है।
अब भरो 44 व 65 हजार
सेक्टर-115 में मुकेश कुमार ने अपने मकान को बिजली के उपकरण बनाने वाली कंपनी में काम करने वाली तीन लड़कियों को किराए पर दिया था। तीनों ने अपने-अपने कमरे में एयरकंडीश्नर लगाए। खूब बिजली फूंकी। जब 11 माह बाद छोड़कर गईं तो पता चला कि मकान का बिजली का बिल 44 हजार रुपये है।
जबकि जो बिल अदा किए गए थे उनकी रीडिंग कम होने के कारण बिल कम आए थे। इसी तरह दिल्ली निवासी बीसी कक्कड़ का सेक्टर-82 में फ्लैट है, जिसे 22 माह के लिए एक व्यक्ति को किराए पर दिया था। मगर जब वह छोड़कर गए तो बिल पूरा जमा दिखाया था लेकिन जब दो माह बाद बिल आया तो उसमें 65 हजार बकाया थे।