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बुलंदशहर गैंगरेप खुलासे की थ्योरी पर संदेह, पल-पल बदलती रही पुलिस की स्क्रिप्ट

Tue, 02 Aug 2016 08:54 AM IST
शशि कुमार श्रीवास्तव/अमर उजाला, गाजियाबाद
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बुलंदशहर गैंगरेप - फोटो : अमर उजाला
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हाईवे पर गैंगरेप मामले का खुलासा कर पुलिस ने भले ही तीन आरोपियों को जेल भेज दिया लेकिन मामले में अब भी कई झोल हैं। पुलिस तीनों आरोपियों का आपस में कनेक्शन और उनका बावरिया गिरोह से संबंध जोड़ने में नाकाम रही है। 
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तीनों आरोपी अलग-अलग जिले के हैं। इतना ही नहीं डीजीपी की प्रेस कान्फ्रेंस में खुलासे के बाद दो आरोपियों को बदलने पर भी पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। 

इससे डीजीपी का खुलासा ही संदिग्ध हो गया है। यही कारण रहा कि पुलिस आरोपियों को मीडिया के सामने नहीं लेकर आई। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों में से किसी एक की भी क्राइम हिस्ट्री नहीं बता सकी है।
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आरोपियों के आपसी कनेक्शन का खुलासा नहीं कर सकीं डीआईजी

बुलंदशहर गैंगरेप - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश सरकार और राजनीतिक दबाव में काम कर रही पुलिस ने जिन तीन आरोपियों को बिना मीडिया से रूबरू कराए बिना आनन फानन में जेल भेज दिया वे जबर सिंह निवासी नोएडा, रईस निवासी बुलंदशहर और साबिज निवासी हापुड़ हैं।

तीनों अलग-अलग जिले से हैं, इनके आपसी कनेक्शन का खुलासा डीआईजी नहीं कर सकीं। पुलिस ने तीनों की क्राइम हिस्ट्री तक नहीं बताई। स्थानीय होने के कारण रईस के घर वालों ने उसका पुलिस रिकार्ड न होने का दावा किया है। 

ऐसे में अन्य की आपराधिक हिस्ट्री होने पर भी सवाल उठ रहे हैं। जब क्राइम हिस्ट्री ही नहीं है तो पुलिस के पास इनके फोटो भी नहीं होंगे जबकि डीआईजी लक्ष्मी सिंह का कहना है कि 200 फोटो दिखाने के बाद क्रिमिनलों की पहचान कराई गई। 

पुलिस ने आरोपियों को छुपाने में लगाई ताकत

बुलंदशहर गैंगरेप - फोटो : अमर उजाला
पुलिस की पूरी थ्योरी में ही झोल नजर आ रहा है। सोमवार को बुलंदशहर पहुंचे प्रमुख सचिव (गृह) देवाशीष पांडा और डीजीपी जावीद अहमद के सामने तीन लोगों को हिरासत में लिए जाने खुलासा किया था।

मंगलवार को दो नए आरोपियों को जोड़ दिया। इनमें बुलंदशहर के सुतारी गांव का रईस कॉमन है जबकि अन्य दो आरोपी फरीदाबाद का बबलू और बठिंडा के नरेश का घटना से संबंध पुलिस 72 घंटे बाद भी नहीं बता सकी है, बस उनसे पूछताछ का हवाला दे रही है। 

पुलिस ने आरोपियों को छुपाने में लगाई ताकत
वारदात के बाद पूरे दिन (शनिवार को) पुलिस मामले को दबाने में लगी रही जबकि सोमवार को आरोपियों को मीडिया से बचाने में पूरी ताकत झोंक दी। पुलिस प्रेस कान्फ्रेंस में मीडिया से आरोपियों से बात भी नहीं कराई और बहाने बनाकर टालती रही। आरोपियों ने वैन में अपने चेहरे से नकाब हटाने की कोशिश की तो पुलिस ने दोबारा ढक दिए।
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72 घंटे में पल-पल बदलती रही पुलिसिया स्क्रिप्ट

बुलंदशहर गैंगरेप - फोटो : अमर उजाला
गैंगरेप होने के 72 घंटे के अंदर पुलिस ने कई बार अपनी स्क्रिप्ट बदली। कभी आरोपी छह तो कभी आठ बताए। एक ओर पुलिस पकड़े तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया है, लेकिन यह तक नहीं बता सकी आरोपी वारदात करने कार से आए थे या पैदल आए थे। 

वह वापस कैसे गए। पुलिस उनका बावरिया कनेक्शन बताती रही, तीनों आरोपियों का संबंध नहीं जोड़ सकी। पुलिस आरोपियों के बावरिया होने का दावा कर रही है, लेकिन उनका कनेक्शन ठीक तरह से नहीं जोड़ पा रही है। 

पुलिस अब तक नहीं बता सकी है कि इस गैंग का किस ट्राइव से संबंध है। बुलंदशहर का रईस घुमंतू जाति का नहीं है। उसकी रहन-सहन की शैली भी आम आदमी जैसी है। 

उसका आधार कार्ड भी बना हुआ है। ऐसे में उसके बावरिया होने के दावे पर सवाल उठ रहे हैं। बता दें कि बावरिया 500 रुपये की लूट के लिए भी मर्डर करने से नहीं डरते। 

उनकी कार्यशैली आम क्रिमिनल से बिल्कुल जुदा है। हालांकि वह रेप भी करते हैं, लेकिन अपने शिकार को आसानी से जिंदा नहीं छोड़ते। गैंगरेप की घटना में काफी कुछ बावरियों से मिलता-जुलता है, लेकिन पूरी तरह नहीं।
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