बॉलीवुड मूवी स्पेशल-26 की तर्ज पर खुद को पुलिसकर्मी बताकर भोले-भाले लोगों से ठगी करने वाले ईरानी गैंग को पश्चिम जिला स्पेशल स्टाफ पुलिस ने दबेचा है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान गैंग लीडर नासिर हफीज खान उर्फ समीर अली उर्फ इरानी (33), असुशाहजमां सैयद उर्फ असु (25), बरकत अली (34) और जफर अब्बास अमजद शेख (22) के रूप में हुई है।
पुलिस की मानें तो गैंग कैश ले जाने वाले या जेवरात पहने हुए बुजुर्ग को बदमाशों द्वारा लूटे जाने का डर दिखाते थे। बाद में असली जेवरात को नकली से बदल देते थे। आरोपियों के पास से एक स्कूटी, बाइक, कुछ जेवरात, दिल्ली व महाराष्ठ पुलिस के आईकार्ड व कुछ फर्जी आईडी बरामद की हैं। गैंग लीडर नासिर व उसके साथ जफर की महाराष्ट्र पुलिस को मकोका में तलाश थी।
पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त विजय कुमार ने बताया कि 9 अप्रैल को रमेश कुमारी वर्मा नामक 74 वर्षीय महिला ने राजौरी गार्डन में इसी तरह ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। बदमाशों ने लुटने का डर दिखाकर पीड़िता के पहने जेवरात उतरवाकर उन्हें एक कागज में लपेटकर देने का ढोंग किया। आरोपियों ने पीड़िता के असली जेवरात बदल लिये और रफूचक्कर हो गए। लोकल पुलिस के अलावा जिले की स्पेशल स्टॉफ पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू की।
इधर एसीपी जगजीत सांगवान, इंस्पेक्टर सुरेंदर संधु, एसआई संदीप डबास, समर सिंह व अन्यों की टीम को सूचना मिली कि वारदात को अंजाम देने वाली गैंग मस्जिद लेने भोगल के पास आने वाला है। सूचना के बाद पुलिस ने आरोपियों को दबोच लिया। उनके पास से एक बाइक, स्कूटी व अन्य सामान बरामद हुआ।
नासिर के पास से एक बैग बरामद हुआ, जिसमें पुलिस के आईकार्ड के अलावा महाराष्ट्र पुलिस द्वारा जारी पुलिस मित्र का आईकार्ड, कुछ जेवरात व फर्जी आईडी, आधार, पैन कार्ड बरामद हुआ। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि स्कूटी को हरी नगर इलाके से चोरी किया गया था, जबकि बरामद बाइक नासिर के साले ने उसे दी थी। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कबूला कि इन लोगों ने 100 से अधिक वारदातों को अंजाम दिया। इनकी गिरफ्तारी से दिल्ली में ठगी के 35 मामले सुलझे हैं।
पूछताछ के दौरान आरोपी नासिर ने बताया कि यह चार लोगों का गैंग ठगी की वारदात को अंजाम देता था। गैंग के दो सदस्य सफारी सूट में खुद को पुलिस अधिकारी बताकर बुजुर्ग महिलाओं व लोगों को शिकार बनाते थे। जेवरात पहने बुजुर्ग से कहा जाता था कि कुछ देर पहले यह लूटपाट हुई और आप जेवरात पहने हैं।
जेवरात को उतरवाकर एक कागज या रूमाल में लपेटकर उन्हें वापस करने का दिखावा किया जाता था। हकीकत में जेवरात बदल दिए जाते थे। आरोपियों ने इसी तरह देश के कई हिस्सों में ठगी की वारदातों को अंजाम दिया। 2015 में महाराष्ट्र पुलिस ने नासिर व जफर पर मकोका का केस दर्ज किया था। तभी से आरोपी दिल्ली आकर छुपे हुए थे। नासिर ने फर्जी आईडी बनवाकर अपना नाम भी नासिर से समीर अली रखा हुआ था।
पकड़े गए चोरों आरोपी मूलरूप से ईरान के रहने वाले हैं। इनके पूर्वजों को गोलकुंडा के राजाओं ने ईरान से बुलाया था। चौड़ी कदकठी वाले इन ईरानियों को इन लोगों ने अपना सुरक्षा गार्ड बनाया था। तभी से यह लोग भारत में ही बस गए। इन लोगों ने आंबिवली, कल्यान, ठाणे, महाराष्ट्र में ईरानी बस्ती बसा ली।
इनके परिजन वहीं कामधंधों में लग गए। महाराष्ट्र में सभी को ईरानियों के नाम से ही जाना जाता था। सभी आरोपियों की पैदाइश महाराष्ट्र की ही थी। इन लोगों ने महाराष्ट्र में अपराध शुरू कर दिया। पुलिस का दबाव बढने के बाद यह दिल्ली भाग आए। नासिर ने बस्ती हजरत निजामुद्दीन में ही शादी भी कर ली।