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गोयल की कोठी में रहने से डरते हैं लोग

Mon, 19 May 2014 01:17 PM IST
अरीश रिजवी/अमर उजाला, गाजियाबाद
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नई बस्ती में सतीश गोयल समेत फैमिली के सात लोगों की हत्या को याद कर आज भी लोग सिहर उठते हैं। वारदात के एक साल बाद भी फैमिली के लोग इस सनसनीखेज नरसंहार की गवाह रही कोठी में रहने से डरते हैं।
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शायद यही वजह है कि कोठी को अब तक न तो खरीदार मिला और न ही किराएदार। कोठी में ताला लगा और सतीश की पशु आहार की दुकान भी बंद हो गई। इसी दुकान ने सतीश गोयल को कारोबार की नई ऊंचाईयों पर पहुंचाया था।

गाजियाबाद के इस सनसनीखेज नरसंहार का केस अंडर ट्रायल है। चाकू की दुकान वाले और राहुल के दोस्त की गवाही हो चुकी है। राहुल का परिवार किसी से ज्यादा मतलब नहीं रखता है।
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रविवार को अमर उजाला टीम बजरिया में राहुल के घर पहुंची तो राहुल की दादी ने घर का गेट बंद कर लिया। दादी ने हत्याकांड और राहुल के बारे में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।

दूसरी ओर, केस की पैरवी कर रहे सतीश गोयल के छोटे दामाद सचिन मित्तल का कहना है कि राहुल को फांसी की सजा होनी चाहिए। उस सदमे से उनका परिवार आज तक उबर नहीं पाया है।

जिक्र आते ही खूनी रात का खौफनाक मंजर याद आ जाता है। उन्होंने कुछ दिन ससुर की पशु आहार की दुकान खोली थी, मगर अब पूरी तरह से बंद कर दी है।

वो खूनी रात... हत्याएं सात
यह वारदात 21 मई 2013 की रात घंटाघर के पास नई बस्ती मोहल्ले में हुई थी। मृतकों में बिल्डर और पशु आहार व्यापारी सतीश गोयल (65), पत्नी मंजू (62), बेटा सचिन (35), पुत्रवधु रेखा (30), पोतियां मेघा (13), नेहा उर्फ हनी (10) और पोता अमन (7) थे। घर से 25-30 लाख रुपये गायब बताए गए थे, जिनका पता नहीं चल सका है।

हृदयविदारक घटना से लखनऊ तक हिल गया था। पुलिस ने हत्याकांड का 24 घंटे में ही पर्दाफाश कर दिया था। वारदात से 10 दिन पहले निकाले गए ड्राइवर राहुल वर्मा निवासी बजरिया को गिरफ्तार किया था।

पुलिस का दावा था कि राहुल ने साढ़े चार लाख चोरी किए थे, इसलिए उसे निकाल दिया गया था। इसी खुन्नस और लूट की फिराक में उसने हत्याएं की थीं। राहुल 12वीं तक पढ़ा है, उसने दिल्ली के इंस्टीट्यूट से एनिमेशन कोर्स भी किया है।
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