हाईकोर्ट ने सुपरटेक के जार प्रोजेक्ट के सभी अतिरिक्त फ्लैटों को सील करने का आदेश दिया है। सुपरटेक की तरफ फ्लैटों के बारे में भ्रामक ब्योरा देने पर नाराजगी जताई। बिल्डर के वकील ने दूसरा शपथपत्र दाखिल करने के लिए और वक्त मांगा है, जिस पर कोर्ट ने 2 मई की तिथि तय की है।
दरअसल, ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-ओमीक्रॉन वन स्थित जार प्रोजेक्ट को सुपरटेक ने 2007 में लांच किया था। उस समय 844 फ्लैट बनाने की अनुमति थी, लेकिन 1904 फ्लैट बना दिए। इसके खिलाफ फ्लैट खरीदार कोर्ट चले गए थे। कोर्ट ने बिल्डर से जवाब मांगा।
बिल्डर ने बताया कि 400 फ्लैट ही बचे हैं, जिन पर पजेशन नहीं दिया गया है। बाकी पर थर्ड पार्टी राइट (पजेशन) मिल चुका है। कोर्ट ने बीते 11 जनवरी को आदेश दिया, कि जब तक इस मामले में फैसला न आ जाए, तब तक बिल्डर इन फ्लैटों को न तो बेच सकता है और न ही किसी को पजेशन दे सकता है। साथ ही प्राधिकरण से इन फ्लैटों को सील करने को कहा।
कोर्ट ने प्राधिकरण से फ्लैटों का सर्वे कर रिपोर्ट भी मांगा। प्राधिकरण ने सर्वे में 1040 फ्लैट अतिरिक्त बनाए जाने की बात सामने आई, जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने 18 अप्रैल को इन फ्लैटों को सील करने का आदेश दिया है। इसकी जिम्मेदारी प्राधिकरण को दी गई है।
खरीदारों की तरफ से इस मामले की पैरवी कर रहे फ्लैट खरीदार एके सिंह ने बताया कि गलत जानकारी देने पर कोर्ट ने कंपनी को फटकार भी लगाई, जिस पर उनके वकील नए शपथपत्र के लिए और वक्त मांगा है। कोर्ट ने 2 मई की तिथि तय की है। उन्होंने बताया कि बिल्डर करीब 330 फ्लैट का कंपलीशन सर्टिफिकेट लेकर रजिस्ट्री भी कर चुका है।