करीब 12 भाषाओं का जानकार एक बुजुर्ग सीबीआई अफसर बनकर अपने साथी के साथ लोगों को ठगता था। बुधवार को पुलिस ने दोनों को पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर धर दबोचा।
आरोपियों की पहचान गली नंबर-9 रेलवे कॉलोनी के पास, न्यू विकास नगर, लोनी (गाजियाबाद) निवासी भूषण प्रसाद (62) और मिशन कंपाउंड पालमपुर, कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) निवासी संजीव गिल (53) के रूप में हुई। भूषण ने बताया कि वह करीब 200 वारदात कर चुका है।
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उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त मधुर वर्मा ने बताया कि गांव बदनपुर, जिला फर्रूखाबाद (यूपी) निवासी श्यामसुंदर ने बुधवार को कोतवाली थाने में ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया कि 19 सितंबर को वह फतेहगढ़ (यूपी) से एलएनजेपी अस्पताल में इलाज कराने के लिए दिल्ली आया था।
पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के बाहर उसे एक व्यक्ति मिला। वह उससे रूट नंबर 901 की बस के बारे में पूछने लगा। उक्त शख्स श्यामसुंदर को लालकिले के पास ले गया। उसी समय एक बुजुर्ग उनके पास आया और खुद को सीबीआई अफसर बताते हुए अपहरण के मामले में श्यामसुंदर से पूछताछ करने लगा।
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इस बीच उसने श्यामसुंदर से 500 रुपये व एटीएम कार्ड ले लिया और बाद में उसके खाते से 25 हजार रुपये निकाल लिए। आरोपियों को तलाश करते हुए श्यामसुंदर 24 सितंबर को पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचा। वहां उसने दोनों आरोपियों को देखकर शोर मचा दिया। गश्त कर रहे सिपाही चंद्रपाल व हरीश कुमार ने आरोपियों को धर दबोचा।
इनके कब्जे से श्यामसुंदर का एटीएम कार्ड, फर्जी आई कार्ड और बैंक का लिफाफा बरामद किया गया। पूछताछ में पता चला कि आरोपी बुजुर्ग मराठी, गुजराती, सिंधी, बंगाली, मलयालम, कन्नड़, हिंदी व राजस्थानी फर्राटेदार बोलता है। वह जिस राज्य के व्यक्ति से मिलता था, उससे उसी की भाषा में बात करता था। आरोपियों ने हाल ही में एक शख्स से डेढ़ लाख रुपये की ठगी की थी।