परिवहन विभाग की वीवीआईपी वाहन नंबरों की बुकिंग साइट पर दलालों ने कब्जा जमा लिया है। साइट के खुलते ही दलाल वीवीआईपी नंबरों को ब्लाक कर देते हैं, इससे ये नंबर साइट पर दिखाई नहीं देते हैं।
कुछ दिन बाद रात में इन्हें चहेतों को आवंटित कर दिया जाता है। इसमें आरटीओ आफिस की मिलीभगत भी मानी जा रही है। पता चलने पर अफसरों ने साफ्टवेयर में बदलाव को पत्र लिखने की बात कही है।
वीवीआईपी नंबरों पर शुरू से मारामारी के बाद शासन ने इन्हें आनलाइन कर दिया था। आनलाइन होने के बाद भी नंबरों पर कुछ ही लोगों का कब्जा है। वीवीआईपी नंबर एक से 21 तक और इससे ऊपर के खास नंबर आम लोगों को नहीं मिल रहे हैं।
सीरीज के कुछ खास नंबर एक ही मोबाइल नंबर से बुक हैं। केवल गाजियाबाद ही नहीं, आसपास के जिलों के खास नंबर भी इसी मोबाइल नंबर से बुक हैं। नोएडा के वीवीआईपी नंबर तो पिछले महीने आधे से ज्यादा ब्लाक कर दिए गए थे।
ऐसे करते हैं नंबर ब्लाक-सिंडीकेट के सदस्य सीरीज शुरू होने का सही वक्त पता कर लेते हैं। ऐसे में तत्काल नंबर बुक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।
इसको शुरू करके बिना भुगतान किए बीच में ही छोड़ देते हैं। इस तरह ये नंबर आनलाइन स्क्रीन पर दिखाई नहीं देते। इसको नंबर ब्लाक करना बोलते हैं। फिर चुपचाप नंबर का भुगतान कर प्रक्रिया पूरी कर देते हैं।
इस मामले वरिष्ठ एआरटीओ केपी गुप्ता ने बताया कि साफ्टवेयर में कई कमियां हैं। इनको दूर करने के लिए विभागीय विशेषज्ञों को लिखा गया है।