मर्सिडीज हिट एंड रन मामले में नाबालिग आरोपी की जमानत रद्द करने की मांग दिल्ली पुलिस ने की है। पुलिस ने कहा कि जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) ने गलत तरीके से नाबालिग को राहत दी थी। उस पर तेज रफ्तार से कार चलाते हुए युवक की जान लेने का आरोप है।
तीस हजारी अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार ने अभियोजन की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। 18 मई को अदालत अपना फैसला सुनाएगी। लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने अर्जी पर बहस करते हुए कहा कि जेजेबी ने नाबालिग को गलत तरीके से जमानत प्रदान की है क्योंकि उसके बालिग होने के बाद नए सिरे से जमानत याचिका नहीं की गई थी।
जेजेबी ने 19 अप्रैल को नाबालिग की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद बोर्ड ने प्रवेश परीक्षाओं में बैठने के लिए नाबालिग को 26 अप्रैल को जमानत प्रदान कर दी थी। इसके लिए नाबालिग की ओर से कोई नई याचिका दायर नहीं की गई थी। वहीं बचाव पक्ष ने अभियोजन की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि नाबालिग को सही तरीके से जमानत प्रदान की गई है और उसके कल्याण को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
पेश मामले में चार अप्रैल को सिविल लाइन इलाके में नाबालिग ने तेज रफ्तार से कार चलाते हुए सिद्घार्थ शर्मा (35) को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में सिद्घार्थ की मौत हो गई थी। पुलिस ने इस सिलसिले में लापरवाही से काम करते हुए जान लेने, गफलत में वाहन चलाने, किसी को जानलेवा चोट पहुंचाने संबंधी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।