वर्ष 2011 में 22 साल के एमबीए छात्र आशुतोष का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई थी। डीएनए टेस्ट के आधार पर गाजियाबाद के मुरादनगर इलाके से बरामद शव की शिनाख्त आशुतोष के रूप में हुई है। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी को सालों तक शव बरामद न होने के कारण अदालत से जमानत मिल गई थी। अपराध शाखा ने अब जमानत पर छूटे आरोपी से फिर पूछताछ शुरू कर दी है।
अपराध शाखा के अतिरिक्त आयुक्त राजीव रंजन के मुताबिक, 22 वर्षीय आशुतोष मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया का निवासी था। वह दिल्ली के प्रह्लादपुर इलाके में रहकर नौकरी और एमबीए की पढ़ाई करता था। 2011 में 4 मार्च को आशुतोष अचानक गायब हो गया। उसके पिता ने प्रह्लादपुर थाने में बेटे की गुमशुदगी दर्ज कराई। आशुतोष को आखिरी बार प्रमोद कुमार के साथ देखा गया था। इसी आधार पर पुलिस ने प्रमोद को गिरफ्तार कर लिया था। प्रमोद के आठ महीने तक जेल में रहने के दौरान आशुतोष का कोई सुराग नहीं मिला तो अदालत ने उसे जमानत दे दी थी।
इसके बाद आशुतोष के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच अपराध शाखा को सौंप दी। अपराध शाखा ने आशुतोष को काफी तलाशा पर सुराग नहीं लगा सकी। इसके बाद पुलिस ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में मिले लावारिस शवों के डीएनए की पड़ताल की।
गाजियाबाद के मुरादनगर में मिले एक युवक के शव की डिटेल आशुतोष से मिलने के बाद पुलिस ने उसके विसरे का डीएनए टेस्ट कराया। उसकी पहचान आशुतोष के रूप में हुई। अब पुलिस प्रमोद से पूछताछ कर यह पता लगाने क कोशिश कर रही है कि इस वारदात में कितने लोग शामिल थे और वारदात को अंजाम क्यों दिया गया।