सीबीआई अकादमी में तैनात दारोगा के घर दो दिन पहले हुई चोरी का खुलासा करते हुए पुलिस ने चोरी कर फरार हुए नौकर को गिरफ्तार कर माल बरामद किया है।
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गिरफ्तार नौकर से जब पूछताछ हुई तो पुलिस के साथ-साथ सीबीआई के दारोगा के भी होश फाख्ता हो गए। नौकर के खिलाफ हत्या, लूट, डकैती, डकैती के दौरान हत्या के एक दो नहीं बल्कि बाइस मामले दर्ज थे।
उस पर फैजाबाद पुलिस की तरफ से पांच हजार रुपये का इनाम भी घोषित था। सीबीआई के दारोगा ने बिना सत्यापन के उसे नौकर के रूप में रख रखा था। पुलिस यह भी पता कर रही है कि वह हिस्ट्रीशीटर बदमाश है या नहीं।
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नौकर ने ऐसे फैलाया जाल
सीओ थर्ड राजकुमार मिश्र ने बताया कि 21 अप्रैल को होशियारपुर गांव निवासी राजेन्द्र सिंह यादव, जो कि सीबीआई अकादमी गाजियाबाद में दारोगा हैं, उन्होंने थाना सेक्टर-49 में नौकर वेदप्रकाश यादव निवासी ग्राम पिटेली, थाना कुमारगंज जिला फैजाबाद के खिलाफ घर से सोने, चांदी, हीरे के जेवरात, नकदी व मोबाइल फोन चोरी करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर मंगलवार की रात आरोपी वेदप्रकाश यादव को गिरफ्तार कर चोरी किया गए जेवरात, 14 हजार की नकदी बरामद की। पूछताछ में पता चला कि वेदप्रकाश का असली नाम श्रीराम सिंह है।
उसके खिलाफ फैजाबाद, सुल्तानपुर में हत्या, लूट, डकैती, डकैती के दौरान हत्या, गैंगस्टर के बाइस मामले दर्ज हैं। वर्ष 2008 में सीबीआई के दारोगा के घर किराए पर कमरा लेकर रहा और उसके बाद उनका विश्वास पात्र बन गया। उनकी कार के चालक के साथ साथ नौकर का भी काम करने लगा।
गर्लफ्रेंड को देना चाहता था आराम की जिंदगी
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार वेदप्रकाश उर्फ श्रीराम सिंह ने वर्ष 1985 में अपराध की दुनिया में कदम रखा। पहला मामला लूट व लूट केदौरान हत्या का थाना कुमारगंज फैजाबाद में दर्ज हुआ।
उसके बाद वर्ष 1996 तक उसने फैजाबाद व सुल्तानपुर में अपना गिरोह बना कर ताबड़तोड़ लूट, हत्या व डकैती की वारदात को अंजाम दिया। प्रेमिका को लेकर आराम की जिंदगी जीने के लिए वर्ष 2004 में दिल्ली आ गया।
यहां उसने अपना नाम बदल दिया। शुरू में उसने पुरानी दिल्ली से कपड़े खरीद कर साप्ताहिक बाजार में दुकान लगाई लेकिन छोटी मोटी नौकरी की। इसी दौरान व दारोगा के संपर्क में आ गया था।
एक महीने पहले बनाया था प्लान
पुलिस के मुताबिक सीबीआई दारोगा के घर वारदात करने की योजना वेदप्रकाश ने एक माह पहले ही बना ली थी। इसलिए उसने एक माह पहले ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल बंद कर दिया।
वेदप्रकाश का मकान छोड़ कर सदरपुर में रहने लगा। 21 अप्रैल को जब पूरा परिवार शनिधाम के लिए चला गया। तो वह पहुंच गया और वारदात को आसानी से अंजाम दे दिया।
वारदात के दौरान घर में मौजूद दारोगा की बेटी की शादी के एलबम में उसकी जहां-जहां फोटो थी, उसे निकाल लिया। डायरी में जहां उसका नाम पता दर्ज था उस पन्ने को भी फाड़ लिया था।
वारदात के बाद पुलिस, सीबीआई के दारोगा व उनका परिवार नौकर वेदप्रकाश को खोजने लगा। सीबीआई के दारोगा को पता चला कि उसकी पत्नी सदरपुर के एक स्कूल में चपरासी है। वह उस तक पहुंच गए और पुलिस ने अपनी तरफ से घेराबंदी की तो वेदप्रकाश हत्थे चढ़ गया।
पुलिस की माने तो सीबीआई दारोगा का पूरा परिवार शनिधाम गया था, इसलिए बड़ी वारदात टल गई। घर पर अगर कोई सदस्य रह जाता तो वेदप्रकाश वारदात का विरोध करने पर हत्या करने से भी न चूकता।
गिरफ्तार वेदप्रकाश उर्फ श्रीराम ने पुलिस को बताया कि उसने पूरे जेवरात व नकदी नहीं चोरी की थी। कुछ जेवरात उसने साहब के लिए भी छोड़ दिए थे ताकि उनकेकाम आ सके। वह चोरी के जेवरात बेच कर कोई बिजनेस करना चाहता था। अपने परिवार को तंगहाली से निकाल कर उन्हें एक नेक जिंदगी देना चाहता था। इसलिए उसने साहब के भरोसे में सेंध लगा दी।