दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दिल्ली में एक और किडनी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक आरोपी संगम विहार स्थित बत्रा अस्पताल का कर्मचारी है। ये रैकेट सौदा करने के लिए डोनर का बाकायदा मेकओवर भी करते थे। यही नहीं, उसकी फर्जी डीएनए रिपोर्ट भी बनाई जाती थी।
किडनी रैकेट मामले में नाम आने के बाद दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने बत्रा अस्पताल के सीनियर डॉक्टर से पूछताछ की है। पुलिस सूत्रों की मानें तो डॉक्टर ने किडनी रैकेट से जुड़े होने की बात से इंकार किया है। उन्होंने पुलिस को बताया है कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता जयदीप शर्मा को हैदराबाद के दंपति का बेटा बताकर अस्पताल प्रशासन से मिलवाया था।
इस संबंध में आरोपियों ने सभी कागजात भी उन्हें दिए थे। सूत्रों के मुताबिक बत्रा अस्पताल के सीनियर डॉक्टर को रविवार को दुबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया है। इधर पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया है कि तीन-चार और बड़े अस्पतालों में किडनी रैकेट चलाने वाले गैंग के तार जुड़े हुए है। पुलिस उसके आधार पर मामले की छानबीन कर रही है।
आरोपियों ने हैदराबाद के एक शख्स को किडनी दिलाने के लिए उसके परिजनों से 40 लाख रुपये लिए और जयपुर के एक एमबीए छात्र को किडनी डोनेट करने के लिए उससे चार लाख रुपये में सौदा तय कर लिया।
सौदा तय होने के बाद बृहस्पतिवार को बत्रा अस्पताल ने डोनर को अस्पताल बुलाया। जहां डॉक्टरों की कमेटी ने उसे किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए हरी झंडी दे दी। पूरे मामले पर नजर रख रही क्राइम ब्रांच ने अलग- अलग जगहों से चार आरोपियों को दबोच लिया। गिरोह ने अब तक 20 किडनी ट्रांसप्लांट करवाने की बात स्वीकार की है।
क्राइम ब्रांच के संयुक्त आयुक्त प्रवीर रंजन ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कटक उड़ीसा निवासी जयंत साहू उर्फ राहुल, जजपुर उड़ीसा निवासी सुलेखा पांडा, खुरदा उड़ीसा निवासी अनोज पात्रा व किशनगढ़ बसंतकुंज निवासी बिरजू पासवान के रूप में हुई है। बिरजू पासवान बत्रा अस्पताल का कर्मचारी है। इससे पूर्व वह दिल्ली के अन्य बड़े अस्पताल में काम कर चुका है।
पुलिस के अनुसार जयदीप शर्मा जयपुर में एमबीए की पढ़ाई कर रहा है। जयदीप के मुताबिक उसका दोस्त राजेश पिछले साल सितंबर माह में इंटरनेट पर सर्च कर रहा था। इस दौरान उसने एक साइट पर देखा कि किडनी डोनेट करने पर मोटी रकम मिलेगी। पैसे की जरूरत की वजह से राजेश गिरोह के संपर्क में आकर दिल्ली आ गया। लेकिन उसके बाद से राजेश का कोई अता-पता नहीं है। जयदीप अपने दोस्त को तलाशने के लिए दिल्ली आया और गिरोह से संपर्क किया। उसके बाद जयदीप एक न्यूज चैनल से संपर्क कर उन्हें सारी जानकारी दी।